पृष्ठ

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर खतरनाक

दिन भर में दो घंटे से ज्यादा वक्त कंप्यूटर गेम्स खेलने या टीवी देखने में बिताने वाले बच्चे गंभीर मानसिक बीमारी के शिकार हो सकते हैं। दूसरे कामों में दिखाई गई सक्रियता भी उन्हें इस खतरे से नहीं बचा सकती। ब्रिटेन में हुए एक रिसर्च में ये बातें सामने आई हैं। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने 10 से 11 साल की उम्र वाले 1000 बच्चों पर रिसर्च करने के बाद इस सच्चाई का पता लगाया है। रिसर्च के लिए चुने गए बच्चों को सात दिनों तक एक सवालों की लिस्ट में आँकड़े भरने को कहा गया। इन सवालों में पूछा गया था कि कितने समय तक उन्होंने टीवी या कंप्यूटर देखा। इसके साथ ही उनसे उनकी मानसिक दशा के बारे में भी सवाल किए गए। बच्चों से उनकी भावनात्मक और व्यावहारिक दिक्कतों के साथ ही संगी साथियों के साथ संबंध निभाने में आने वाली दिक्कतों के बारे में भी पूछा गया। इस दौरान एक मशीन के जरिए उनकी शारीरिक सक्रियता को भी मापा गया। रिसर्च के बाद जो नतीजे आए उनसे पता चला कि जिन बच्चों ने दो घंटे से ज्यादा वक्त टीवी या कंप्यूटर के साथ बिताया, उनमें से 60 फीसदी से ज्यादा बच्चों को मनोवैज्ञानिक दिक्कतें पेश आ रही हैं। टीवी के सामने दो घंटे से कम वक्त बिताने वाले बच्चों में ये दिक्कतें नहीं थीं। रिसर्च करने वालों का कहना है कि इन समस्याओं पर बच्चों की आयु, लिंग, आर्थिक सामाजिक स्थिति और दूसरी चीजों का कोई असर नहीं था। इसके साथ ही बाकी समय में बच्चों की सक्रियता ने भी समस्याओं पर कोई असर नहीं डाला। रिसर्च करने वाले डॉक्टर एंगी पागे ने बताया कि हम जानते हैं कि शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता शरीर और मन दोनों के लिए अच्छी होती है, लेकिन इस बात के पक्के संकेत हैं कि ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहने के कारण नकारात्मक असर हो रहा है। इस बात के कोई प्रमाण नहीं कि अगर शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता खूब ज्यादा हो तो स्क्रीन के साथ थोड़ी ज्यादा देर तक चिपका रहा जा सकता है। रिसर्च करने वाले छात्रों ने ये जरूर देखा कि शारीरिक मेहनत नहीं करने वाले छात्रों में मनोवैज्ञानिक दिक्कतें और बढ़ जाती हैं अगर वो स्क्रीन के साथ ज्यादा समय बिता रहे हों। इसके मुकाबले पढ़ने या होमवर्क करने में वक्त बिताने वाले छात्रों में किसी तरह की मनोवैज्ञानिक दिक्कतों के पैदा होने के कोई संकेत नहीं मिले। 

--------------------------------------------------------------------------------- 

क्या इंटरनेट अमरीका के लिए भस्मासुर बन गया है? इंटरनेट का विकास अमरीका में हुआ लेकिन इन दिनों विकीलीक्स ने इंटरनेट पर लाखों गुप्त दस्तावेज़ प्रकाशित करके अमरीका को हिला कर रख दिया है. क्योंकि इंटरनेट पर लिखने के लिए अख़बार और टेलीविज़न जैसे संसाधन नहीं चाहिए. इसी वजह से विकीलीक्स ने ढाई लाख से ज़्यादा ऐसे गुप्त दस्तावेज़ जारी किए हैं जिन्हें दुनिया भर में फैले अमरीकी दूतावासों से भेजा गया था. इनसे ज़ाहिर होता है कि अपने सहयोगी देशों के बारे में अमरीका की सार्वजनिक और गुप्त राय में बहुत फ़र्क़ होता है. जनतंत्र, बोलने की आज़ादी और मीडिया की आज़ादी को अपना मूल सिद्धांत मानने वाली अमरीका और पश्चिमी देशों की सरकारें विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज से इस क़दर खार खा चुकी हैं कि उन्हें जेल भेजने और यहाँ तक कि उनकी हत्या करवा दिए जाने की बातें खुले आम की जा रही हैं. क्या जिस इंटरनेट को अमरीका की बौद्धिक ताक़त का प्रतीक माना जाता है वो अब अमरीका के गले की हड्डी बन गया है?

कोई टिप्पणी नहीं: