१ अप्रैल २०१० को भारत की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति की गिनती के साथ भारत की पन्द्रवी
जनगणना आरंभ हो गई। इस बार जाति आधारित जनगणना कराई जाएगी। जो जून २०१० से सितम्बर २०११ तक
चलेगी। १८७२ में से ही भारतीय जनगणना देश में जनसंखया आर्थिक गतिविधि, साक्षरता और शिक्षा, आवासीय गृह
और घरेलू सुविधाओं, शहरीकरण, जन्म और मृत्युदर, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, भाषा, धर्म, पलायन,
अपंगता और अनेक दूसरे सामाजिक-सांस्कृतिक जनसंखयीय आंकडों का स्त्रोत रही है। जनगणना में लोगों से
पूछी गई व्यक्तिगत सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाती हैं कोर्ट भी इसमें दखल नही दे सकता।
इस बार जनगणना का कार्य दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण आवास सूची और आवास जनगणना का है।
जो अप्रैल से जुलाई २०१० के बीच पूरा किया जाएगा। दूसरा चरण आबादी की गणना का है जो पूरे देश में एक
साथ नौ से २८ फरवरी २०१० के बीच होगा।
३५ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ६४० जिलों, ५७६७ तहसीलों, ७७४२ कस्बों और छः लाख से अधिक गांवों मे
यह जनगणना २५ लाख कर्मियों द्वारा की जाएगी। जनगणना में ६४ करोड़ जनगणना फार्म और ५० लाख निर्देश
मैनुयल फार्म को छापने के लिए १२००० मैट्रिक टन कागज लगेगा। जनगणना फार्म १८ भाषाओं में छपेगें।
भारत में जनगणना संविधान के जनगणना एक्ट १९४८ और जनगणना नियम १९९० के तहत की जाती है।
युनीक आइडेंटीफिकेशन कार्ड
२९ सितंबर २०१० को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माहराष्ट्र के नंदरबार जिले में तेभ्ली गांव में १० आदिवासियों को
१२ अंकों का युनिक आइडेंटिफिकेशन कार्ड यानि यूआईडी नंबर वितरित कर इस योजना की शुरुआत की। इस
परियोजना के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी हैं।
२९ सितंबर २०१० को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माहराष्ट्र के नंदरबार जिले में तेभ्ली गांव में १० आदिवासियों को
१२ अंकों का युनिक आइडेंटिफिकेशन कार्ड यानि यूआईडी नंबर वितरित कर इस योजना की शुरुआत की। इस
परियोजना के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी हैं।
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