आमिर खान की थ्री इडियटृस फिल्म कहती है कि यह देश आसाधरण प्रतिभाओं से भरा है। बस जरूरत है परंपरागत ढ़ाचे को बदलकर नई किरण जगाने की। इसी थीम पर थ््राी इडियट ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी पर इलाहाबाद के शैलेन्द्र कुमार सिंह गौड की प्रतिभा के मामले में फिल्म और जमीनी हकीकत में अंतर है। मिस्टर शैलेन्द्र ने अपनी मोटर साइकिल के इंजन में बदलाव कर उसकी माइलेज तीन गुना बढ ा दिया। इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सामने उन्होंने अपनी मौअर बाइक को एक लीटर में ९८ किमी चलाकर दिखाया भी हैंऔर इंस्टीट्यूट इसे प्रमाणित भी करती है। धुन के पक्के शैलन्द का दावा है कि उनके द्वारा विकसित इंजन ने फिलहाल सामान्य इंजन की अपेक्षा प्रतिलीटर २४० का माइलेज दिया है पर अगर किसी अच्छी प्रयोगशाला में इसे बनाया जाए तो यह आकड ा ३०० किमी प्रति लीटर तक आसानी से पहॅंच सकता है। शैलेन्द्र ने बताया कि सामान्य इंजन इंटरनल कंबस्टन इंजन में पिस्टन की गति वर्टिकल होती है जबकि उन्होंने अपने संशोधित इंजन में इसे होरिजेन्टल कर दिया है। इसके अलावा इंजन की कनेक्टिंग रॉड और कैं्रक में भी परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः इंटरनल कंबस्टन इंजन में ईधन का सिर्फ २६ प्रतिशत ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता हैं। जबकि उनके द्वारा निर्मित इंजन में ६० फीसदी तक ईधन गतिज ऊर्जा में तब्दील होता है। यदि इस तकनीकि को फॉलों किया जाए तो औसतन ५० से ६० फीसदी तेल की बचत आसानी से की जा सकती है। शैलेन्द्र ने अपने प्रोटोटाइप इंजन को पेटेन्ट करा लिया है और जल्द ही उसे अंतर्राष्टीय पेन्ट कराने के लिए अमेरिका भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
--आभार सप्ताहिक नई दुनिया स्नेह मधुर
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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011
एक लीटर में २४० किलोमीटर
आमिर खान की थ्री इडियटृस फिल्म कहती है कि यह देश आसाधरण प्रतिभाओं से भरा है। बस जरूरत है परंपरागत ढ़ाचे को बदलकर नई किरण जगाने की। इसी थीम पर थ््राी इडियट ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी पर इलाहाबाद के शैलेन्द्र कुमार सिंह गौड की प्रतिभा के मामले में फिल्म और जमीनी हकीकत में अंतर है। मिस्टर शैलेन्द्र ने अपनी मोटर साइकिल के इंजन में बदलाव कर उसकी माइलेज तीन गुना बढ ा दिया। इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सामने उन्होंने अपनी मौअर बाइक को एक लीटर में ९८ किमी चलाकर दिखाया भी हैंऔर इंस्टीट्यूट इसे प्रमाणित भी करती है। धुन के पक्के शैलन्द का दावा है कि उनके द्वारा विकसित इंजन ने फिलहाल सामान्य इंजन की अपेक्षा प्रतिलीटर २४० का माइलेज दिया है पर अगर किसी अच्छी प्रयोगशाला में इसे बनाया जाए तो यह आकड ा ३०० किमी प्रति लीटर तक आसानी से पहॅंच सकता है। शैलेन्द्र ने बताया कि सामान्य इंजन इंटरनल कंबस्टन इंजन में पिस्टन की गति वर्टिकल होती है जबकि उन्होंने अपने संशोधित इंजन में इसे होरिजेन्टल कर दिया है। इसके अलावा इंजन की कनेक्टिंग रॉड और कैं्रक में भी परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः इंटरनल कंबस्टन इंजन में ईधन का सिर्फ २६ प्रतिशत ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता हैं। जबकि उनके द्वारा निर्मित इंजन में ६० फीसदी तक ईधन गतिज ऊर्जा में तब्दील होता है। यदि इस तकनीकि को फॉलों किया जाए तो औसतन ५० से ६० फीसदी तेल की बचत आसानी से की जा सकती है। शैलेन्द्र ने अपने प्रोटोटाइप इंजन को पेटेन्ट करा लिया है और जल्द ही उसे अंतर्राष्टीय पेन्ट कराने के लिए अमेरिका भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
--आभार सप्ताहिक नई दुनिया स्नेह मधुर
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