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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

वैलेटाइन डे स्पेशल- बस प्यार की बातें

वेलेंटाइन डे का नवयुवकों और नवयुवतियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। वेलेंटाइन डे पर लोग अपने प्यार से अपने प्यार का इजहार करते हैं। वेलेंटाइन डे अब एक त्यौहार की तरह मनाश जाने लगा है। वेलेंटाइन डे पश्चिम की देने है। भारत में लोगों को पहले वेलेंटाइन डे के बारे में ज्यादा पता नहीं था। लेकिन पिछले कुछ सालों से भारत में भी वेलेंटाइन डे काफी लोकप्रिय हो गया है। वेलेंटाइन सप्ताह की शुरूआत 7 फरवरी से ही हो जाती है। 7 फरवरी रोज डे: 7 फरवरी को रोज डे मनाया जाता है। रोज डे के दिन सभी लोग अपने प्यार, दोस्तों या अपने चहेतों को गुलाब का फूल भेंट करते हैं। इस तरीके से एक दूसरे को गुलाब का फूल भेंट कर अपने रिश्ते की शुरूआत करते हैं। दोस्तों को पीले रंग का गुलाब दिया जाता है। यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो उसे लाल रंग का गुलाब देते हैं। यदि वह आपके गुलाब को सहर्ष स्विकार कर लेती है तो समझ लिजिए कि वह भी आपके साथ रिश्ता बढाने में रूचि रखती है। 8 फरवरी प्रपोज डे: 8 फरवरी को प्रपोज डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने प्यार का इजहार करते हैं। यदि आप भी किसी को पसंद करते हैं तो यह दिन आपके लिए बिल्कुल सही है। या आप किसी से दोस्ती करना चाहते हैं तो भी आप इस दिन अपनी भावनाऔं को सामने वाले तक पहुंचा सकते हैं। यदि आप किसी को पसंद करते है तो यह सही दिन है। इस दिन आप अपनी प्यार और दोस्ती की भावनाओं को उस तक पहुंचाएं। इस दिन आप उसे बताएं कि आपके जीवन में उसका क्या स्थान है। 9 फरवरी चॉकलेट डे: इस दिन चॉकलेट डे मनाया जाता है। चॉकलेट डे के दिन अपने दिन कील शुरूआत मीठे से करें। साथ ही अपने दोस्तों और अपने प्यार को चॉकलेट देकर अपने रिश्ते में मिठास घोलनी चाहिए। कहते हैं चॉकलेट से मीठा कुछ भी नहीं होता। साथ ही यह भी कहते हैं कि मीठा खाने से प्यार बढता है। तो आप भी अपने दोस्तों और प्यार को चॉकलेट देकर अपने रिश्तों में मिठास घोल लिजिए और प्यार बढाइए। 10 फरवरी टेडी डे: चॉकलेट डे के बाद आता है टेडी डे। टेडी बहुत ही कोमल होता है। जब आप इस दिन अपने प्यार को टेडी गिफ्ट करेंगे तो आपके दिल की बात अपने आप ही आपके साथी तक पहुंच जाएगी। इस दिन आप अपने साथी को अचछा सा टेडी गिफ्ट करें और अपने रिश्ते को उतना ही कोमल पर मजबूत बनाएं जितना एक टेडी होता है। 11 फरवरी प्रॉमिस डे: इस दिन लोग प्यार में कसमें खाते हैं, जिंदगी भर साथ निभाने का प्रोमिस करते हैं। इस दिन को आप भी अपने प्यार के साथ यादगार बना सकते हैं। इस दिन आप अपने प्यार को कुछ वादे करें और उन्हें ताउम्र निभाने का भी वादा करें। इस दिन आप अपने प्यार से भसी कुछ वादे ले सकते हैं। जैसे कि आई प्रोमिस यू आई विल लव यू टिल द एंड ऑफ माई लाइफ आदि। इससे आपका प्यार और ज्यादा गहरा हो जाएगा। साथ ही आपकी पार्टनर भी आपको पहले से ज्यादा प्यार करने लगेगी। 12 फरवरी किस डे: यह दिन बहुत ही खास है और इसके लिए आप बाजार से अपने प्यार के लिए कुछ अच्छा सा गिफ्ट खरीद सकते हैं। इस दिन आप अपने प्यार को किस करके अपने प्यार की गहराई समझा सकते हैं। आप अपने पार्टनर के हाथ को अपने हाथों में लेकर अपने प्यार की गहराई समझाते हुए उसके हाथ पर अपना लव मार्क छोड सकते हैं। ऎसा करने से आपकी पार्टनर को बहुत अच्छा लगता है। ध्यान रहे कहीं आप भावुकता में कोई बदतमिजी न कर बैठे। इसलिए अपनी मर्यादा में रहकर ही व्यवहार करें। 13 फरवरी हग डे: इस दिन आप अपने पार्टनर को जादू की झप्पी देकर अपनी भावनाओं से अवगत करा सकते हैं। इस दिन आप अपने साथी को हग करके उसे बताए कि आपके दिल में उसकी क्या जगह है। गले लगाने परेशानियां कम हो जाती हैं। इसलिए आप भी अपने पार्टनर को जादू की झप्पी देकर उसे उसकी पसंद का कोई अच्छा सा गिफ्ट दें। 14 फरवरी वेलेंटाइन डे: यह दिन सभी युवकों और युवतियों के लिए खस होता है। इस दिन आप अपने दिल की बात खुलकर कह सकते हैं। यदि आप अब तक अपने साथी को जिसे आप चाहते हैं उसे अपने दिल की बात नहीं कह पाएं है तो इस दिन अपने दिल की बात जरूर कहें। इस दिन अपने प्यार का इजहार जरूर करें और उसे एक अच्छा सा गिफ्ट जरूर दें। यदि उसके दिल में भी आपके लिए कुछ ऎसी ही भावनाएं हैं जैसी आपके मन में है तो वह आपको मना नहीं कर पाएंगी। मैने भी इसी दिन अपने प्यार का इजहार करते हुए अपनी प्रेमिका को कहा था कि विल यू बी माई वेलेंटाइन और उसने हां कर दी आज वह मेरी पार्टनर मेरी लाइफ पार्टनर बन चुकी है। तो आप भी अपने प्यार का इजहार करें। इस पूरे सप्ताह को आप अपने साथी के साथ मिलकर यादगार बनाएं । रोज डे से लेकर वेलेंटाइन डे तक हर दिन आपका खास दिन होगा। पूरे सप्ताह को अपनी जिंदगी का हसीन और यादगार सप्ताह बना लें।

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

अच्छी सेक्स लाइफ से बढ़ता है प्यार

आप अपने पार्टनर से प्यार करते हैं तो सेक्स से परहेज ना करें, बल्कि सोचिए कि सेक्स लाइफ में ‍आप कितने और कैसे-कैसे रंग भर सकते हैं। छोटी-छोट‍ी बातें आपको लाइफ का चरम आनंद दे सकती हैं, बस अपने पार्टनर से कोमलता से पेश आइए, फिर देखिए सेक्स का असली मजा : डांस करें - स्वयं डांस करें या पार्टनर के साथ। चाहे नाचना आता है या नहीं, पर नाचें जरूर। क्योंकि नाचना क्रिएट करता है सेक्स अपील। यह आसान जरिया है लोगों से मिलने का। डांसिंग कॉन्फिडेंस बिल्ड करता है, जो आसान तरीका है लोगों से मिलने का। वर्क आउट - डेली वर्क आउट से सेक्सी बॉडी बनती है। इससे ज्यादा देर सेक्स करने की शक्ति मिलती है। इससे शरीर लचीला हो जाता है और आप ऐसे आसनों का भी आनंद उठा सकती हैं जिनके बारे में सिर्फ ख्वाब देखती हैं। म्यूजिक - हर प्रकार का म्यूजिक सेक्स ‍की क्रिया में आनंददायक साबित होता है। सेक्स क्रिया के दौरान म्यूजिक की रिदिम हेल्प करती है उसे इंजॉय करने में। म्यूजिक से सेक्स के लिए मूड क्रिएट होता है। गानों के बोल भावनाओं में तूफान ला सकते हैं। शेयर फैंटेसी - एक दूसरे को कम से कम अपनी एक फैंटेसी जरूर बताएँ। यदि शेयर करने के बाद उसे एक्सपेरीमेंट कर सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं। संवाद - अपने पार्टनर को समझाएँ कि आपको हर संभव सैक्सुअल प्लेजर दें। कम्यूनिकेशन कीजिए, बिना टच किए हुए। आपको पता है सेक्स एक बेहतरीन एक्सरसाइज है इसे कुशलता से निभाना आना चाहिए।

ब्लडप्रेशर में ना करें सेक्स

सेक्स के समय बॉडी के प्रायवेट पार्ट्स को भी ज्यादा रक्त की जरूरत होती है इससे हार्टबीट तथा ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है। इस समय ब्लडप्रेशर बढ़कर 150 मिलीमीटर मरकरी तक पहुँच सकता है। यदि पहले से ही ब्लडप्रेशर बढ़ा है तो यह 180 मिलीमीटर मरकरी के स्तर तक पहुँचता है। यदि उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लडप्रेशर के मरीज ब्लडप्रेशर पर प्रभावी नियंत्रण रखे बिना सेक्स करते हैं तो ब्लडप्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़कर एंजाइना,हार्ट अटैक व पेरेलीसिस की संभावना बढ़ा देता है। हृदय से धमनियों में निरंतर ब्लड सर्कूलेशन होता रहता है। ऊतकों, कोशिकाओं को पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए धमनियों में रक्त दबाव होता है। स्वस्थ वयस्क व्यक्ति में हृदय के संकुचन के समय सिस्टोलिक प्रेशर 100 से 140 मिलीमीटर मरकरी और हृदय जब संकुचित नहीं होता, तब डायस्टोलिक प्रेशर 60 से 90 मिलीमीटर मरकरी होता है। ब्लडप्रेशर हमेशा एक जैसा नहीं रहता यह बदलता रहता है। सोते समय कम हो जाता है, जबकि मानसिक तनाव, गुस्सा, चिंता, भोजन के बाद, शारीरिक श्रम, व्यायाम तथा सहवास के समय बढ़ जाता है। आराम करने से पुनः सामान्य स्तर पर आ जाता है। यदि किसी व्यक्ति का ब्लडप्रेशर लगातार सीमा से ज्यादा रहता है तो यह दशा उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लडप्रेशर कहलाती है। हाई ब्लडप्रेशर बहुत ही सामान्य समस्या है। आधुनिक तनावयुक्त जीवनशैली, खानपान तनाव, भागदौड़ में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि वयस्कों में करीब 10-12 प्रतिशत व्यक्ति तो इसी समस्या से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों में रोग की प्रारंभिक दशा में कोई विशेष समस्याएँ नहीं होती। हाई ब्लडप्रेशर के कारण ज्यादा शक्ति से कार्य करना पड़ता है, इस कारण हृदय का आकार बढ़ जाता है। इसी वजह से हार्ट फेल्योर, एंजाइनर, हार्टअटैक आदि की संभावना बढ़ जाती है। हाई ब्लडप्रेशर के कारण शरीर के अनेक अंग जैसे गुर्दे, आँखें, क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। पक्षाघात होने की संभावना हो सकती है। मरीजों में यदि रक्तचाप पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो अनेक यौन समस्याएँ भी हो सकती हैं। सेक्स के समय शरीर में कैलोरी की जरूरत बढ़ जाती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए हृदय गति धीरे-धीरे 70-80 से बढ़कर 100-120 प्रति मिनट हो जाती है, जो चरमोत्कर्ष के समय 130-160 प्रति मिनट तक पहुँच जाती है। सेक्स की समाप्ति के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाती है। हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों को पति-पत्नी के अतिरिक्त अन्य से सेक्स रिलेशन नहीं बनाने चाहिए। ऐसा करने पर उत्तेजना और तनाव से ब्लडप्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। मरीज, रोग का निदान होने पर भी चिंतित व तनावग्रस्त रहते हैं, जिस कारण सेक्स पावर भी प्रभावित होती है। उच्च रक्तचाप के मरीज कामक्रीड़ा के समय शीघ्र थक जाते हैं। साँस भी फूलने लगती है, गंभीर रूप से हार्ट फेलेयर हो सकता है, एंजाइना व हार्ट अटैक भी हो सकता है। हाई ब्लडप्रेशर का प्रमुख कारण दीर्घकालीन मानसिक तनाव होता है, जिस के कारण यौन संबंधों से अरुचि, शीघ्रपतन या नपुंसकता की समस्या हो सकती है। साथ ही हाई ब्लडप्रेशर के अनेक मरीज रोग का पता लगाने पर भी चिंतित होकर तनावग्रस्त रहते हैं, जिस कारण सेक्स पावर प्रभावित होती है। यदि आप उच्च रक्तचाप के मरीज हैं तो अपनी आदतें बदलें, भोजन में परहेज करें। जीवन सुव्यवस्थित करें, तनावमुक्त रहें। दुर्व्यसनों को त्यागें। उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण रखें। यदि रक्तचाप ज्यादा है तो यौन संबंधों से बचें जब तक कि यह सामान्य न हो जाए। आप उच्च रक्तचाप की दवाओं का सेवन करते हैं और यौन क्षमता में कमी हो जाती है तो दवाएँ लेना बंद न करें। चिकित्सक को समस्या बताएँ। वह दवा की मात्रा घटा देगा या दवाएँ बदल देगा, जिससे यौन समस्याओं से बचाव हो सकेगा। उच्च रक्तचाप मे मरीज जिन्हें मदिरा, तंबाकू, सिगरेट आदि की लत है को इन चीजों का त्यागकर संतुलित भोजन करना चाहिए जिस में वसा और कैलोरी की मात्रा नियंत्रित हो। नमक इस्तेमाल न करें। यदि वजन ज्यादा है तो वजन कम करें। नियमित व्यायाम करें और तनावमुक्त हलके उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण किया जा सकता है पर उच्च रक्तचाप के अनेक मरीजों को रोग पर नियंत्रण के लिए दवाओं का सेवन करना पड़ता है। उच्च रक्तचाप की अनेक औषधियाँ मरीजों की यौन क्षमता को प्रभावित करती हैं। इसके उपचार के लिए प्रयुक्त इंड्राल (प्रोपेनानाल), मिथाइल डोपर (एंडोमेंट) तथा मूत्र की मात्रा बढ़ाने की औषधियाँ हैं, जो यौन क्षमता घटाती हैं जबकि कुछ दवाएँ जैसे काप्टोप्रिल यौन क्षमता प्रभावित नहीं करतीं। --------------------------------------------------------------------------------- हनीमून तक करें सेक्स का इंतजार क्या आप खुशहाल शादी का रहस्य जानना चाहते हैं? यदि हाँ तो आपको चाहिए कि हनीमून तक सेक्स का इंतजार करें। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि जो जोड़े पुराने तरीके से शादी करते हैं यानी जो हनीमून का आनंद देर से उठाते हैं उनकी शादी ज्यादा खुशहाल होती है और इससे न केवल उनका आपसी संबंध अच्छा होता है बल्कि यौन संबंध भी अच्छा रहता है। प्रमुख अध्ययनकर्ता ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय के प्रो. डीन बस्बे ने कहा कि इस विषय पर ज्यादातर शोध व्यक्ति के यौन अनुभवों पर आधारित होते हैं न कि उसके समय पर। संबंधों में यौन क्रिया से बढ़कर कुछ चीजें होती है और हमने पाया कि जिन लोगों ने अधिक समय तक इंतजार किया उनके संबंधों का यौन पहलू ज्यादा खुशहाल रहा। अध्ययन के अनुसार हनीमून तक यौन संबंधों का इंतजार करने वालों का कहना था कि उनके आपसी संबंध ज्यादा स्थायी और संतोषजनक हैं जबकि शादी से पहले यौन संबंध बनाने वालों के बीच ये तत्व कम देखे गए।

फलदायी है अशोक का पेड़

Rahul Tripathi 

पार्कों में, स्कूलों में ओर अन्य सभी सार्वजनिक जगहों और घरों में अशोक का पेड व्यपक्ता के साथ पाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसे घर में लगााने या इसके जड को धारण करने से व्यक्ति को शोक नहीं होता तथा घर में सुख समृद्धि आती है। इसे स्त्री निरीक्षणदोहक भी कहते हैं, क्योकि इसके सेवन से स्त्रियों के कई रोग मिट जाते हैं और उनका सौन्दर्य में बृद्धि होती है। अशोक के क्या-क्या गुण है आइए जानते हैं- सफलता के लिए अशोक के एक पत्ती तोड कर सिर पर धारक कर लें। जिस काम को करने जा रहे हो वह निश्चित रूप से पूर्ण होगा। धन संबंधी उपाय अशोक वृक्ष की जड को विधिवत ग्रहण करने से कभी भी धन की कमी नही होती।आप चाहे इसकी जड को धन के स्थान पर रख सकते हैं। इससे घर में बरकत आती है। दारिद्रता नाशक दरिद्रता को नाश करने में यह वृक्ष सहायक है।इसके लिए अशो वृक्ष के फूल को प्रतिदिन पीस कर शहद के साथ मिला कर खाएं। कुछ दिन निरंतर खाते रहने से दरिद्रता का अंत हो जाएगा।हां इस दौरान धन देवी की पूा करते रहने चाहिए।शीर्घ ही इच्छा की पूर्ति होगी। रोग नाशक यदि अशोक के पेड की छाल उबाल कर उसके पानी को पिया जाए तो स्त्री के सारे रोग नष्ट हो जाएगे।इसके निरंतर प्रयोग से स्वास्थ्य सुधर जाता है और सौन्दर्य में निखार आता है। चिंता नाशक चिंता चिता की खान होती है लेकिन यदि रोजाना बासी मुॅह अशोक की तीन पत्ते खाए तो इस विकार से बचा जा सकता है। समस्त लाभसमस्त लाभ के लिएयदि अशो बीज को तांबे में भरकर ताबीज के रूप में धारण कियाा जाए तो लाभ प्राप्त होगा। देवताओं को प्रसन्न करें अशोक वृक्ष को काकुल वृक्ष माना जाता है अतः देवी-देवताओं पर इसे अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं ऐसा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

एक लीटर में २४० किलोमीटर

आमिर खान की थ्री इडियटृस फिल्म कहती है कि यह देश आसाधरण प्रतिभाओं से भरा है। बस जरूरत है परंपरागत ढ़ाचे को बदलकर नई किरण जगाने की। इसी थीम पर थ््राी इडियट ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी पर इलाहाबाद के शैलेन्द्र कुमार सिंह गौड की प्रतिभा के मामले में फिल्म और जमीनी हकीकत में अंतर है। मिस्टर शैलेन्द्र ने अपनी मोटर साइकिल के इंजन में बदलाव कर उसकी माइलेज तीन गुना बढ ा दिया। इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सामने उन्होंने अपनी मौअर बाइक को एक लीटर में ९८ किमी चलाकर दिखाया भी हैंऔर इंस्टीट्‌यूट इसे प्रमाणित भी करती है। धुन के पक्के शैलन्द का दावा है कि उनके द्वारा विकसित इंजन ने फिलहाल सामान्य इंजन की अपेक्षा प्रतिलीटर २४० का माइलेज दिया है पर अगर किसी अच्छी प्रयोगशाला में इसे बनाया जाए तो यह आकड ा ३०० किमी प्रति लीटर तक आसानी से पहॅंच सकता है। शैलेन्द्र ने बताया कि सामान्य इंजन इंटरनल कंबस्टन इंजन में पिस्टन की गति वर्टिकल होती है जबकि उन्होंने अपने संशोधित इंजन में इसे होरिजेन्टल कर दिया है। इसके अलावा इंजन की कनेक्टिंग रॉड और कैं्रक में भी परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः इंटरनल कंबस्टन इंजन में ईधन का सिर्फ २६ प्रतिशत ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता हैं। जबकि उनके द्वारा निर्मित इंजन में ६० फीसदी तक ईधन गतिज ऊर्जा में तब्दील होता है। यदि इस तकनीकि को फॉलों किया जाए तो औसतन ५० से ६० फीसदी तेल की बचत आसानी से की जा सकती है। शैलेन्द्र ने अपने प्रोटोटाइप इंजन को पेटेन्ट करा लिया है और जल्द ही उसे अंतर्राष्टीय पेन्ट कराने के लिए अमेरिका भेजने की तैयारी कर रहे हैं। --आभार सप्ताहिक नई दुनिया स्नेह मधुर

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

'आदि मानव शाकाहारी भी थे'

आदि मानवों पर किए गए एक नए शोध के अनुसार आदिमानव (निएंडरथल) सब्ज़ियां पकाते थे और खाया करते थे. अमरीका में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें निएंडरथल मानवों के दांतों में पके हुए पौधों के अंश मिले हैं. यह पहला शोध है जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि आदिमानव अपने भोजन के लिए सिर्फ़ मांस पर ही निर्भर नहीं रहते थे बल्कि उनके भोजन की आदतें कहीं बेहतर थीं. यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज़ में छपा है. आम तौर पर लोगों में आदि मानवों के बारे में ये धारणा रही है कि वो मांसभक्षी थे और इस बारे में कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी मिल चुके हैं. अब उनकी हड्डियों की रासायनिक जांच के बाद मालूम चलता है कि वो सब्ज़ियां कम खाते थे या बिल्कुल ही नहीं खाते थे. इसी आधार पर कुछ लोगों का ये मानना था कि मांस भक्षण के कारण ही हिमकाल के दौरान बड़े जानवरों की तरह ये मानव भी बच नहीं पाए. हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे एलिसन ब्रुक्स, प्रोफेसर हालांकि अब दुनिया भर में निएंडरथल मानवों के अवशेषों की जांच रासायनिक जांच से मिले परिणामों को झुठलाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मानवों के दांतों की जांच के दौरान उसमें सब्ज़ियों के कुछ अंश मिले हैं जिसमें कुछ तो पके हुए हैं. निएंडरथल मानवों के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं वहां पौधे भी मिलते रहे हैं लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं था कि ये मानव वाकई सब्ज़ियां खाते थे. जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलिसन ब्रुक्स ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ‘‘हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे.’’

'आदि मानव शाकाहारी भी थे'

आदि मानवों पर किए गए एक नए शोध के अनुसार आदिमानव (निएंडरथल) सब्ज़ियां पकाते थे और खाया करते थे. अमरीका में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें निएंडरथल मानवों के दांतों में पके हुए पौधों के अंश मिले हैं. यह पहला शोध है जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि आदिमानव अपने भोजन के लिए सिर्फ़ मांस पर ही निर्भर नहीं रहते थे बल्कि उनके भोजन की आदतें कहीं बेहतर थीं. यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज़ में छपा है. आम तौर पर लोगों में आदि मानवों के बारे में ये धारणा रही है कि वो मांसभक्षी थे और इस बारे में कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी मिल चुके हैं. अब उनकी हड्डियों की रासायनिक जांच के बाद मालूम चलता है कि वो सब्ज़ियां कम खाते थे या बिल्कुल ही नहीं खाते थे. इसी आधार पर कुछ लोगों का ये मानना था कि मांस भक्षण के कारण ही हिमकाल के दौरान बड़े जानवरों की तरह ये मानव भी बच नहीं पाए. हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे एलिसन ब्रुक्स, प्रोफेसर हालांकि अब दुनिया भर में निएंडरथल मानवों के अवशेषों की जांच रासायनिक जांच से मिले परिणामों को झुठलाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मानवों के दांतों की जांच के दौरान उसमें सब्ज़ियों के कुछ अंश मिले हैं जिसमें कुछ तो पके हुए हैं. निएंडरथल मानवों के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं वहां पौधे भी मिलते रहे हैं लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं था कि ये मानव वाकई सब्ज़ियां खाते थे. जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलिसन ब्रुक्स ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ‘‘हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे.’’