भारत प्यारा देश हमारा, इसकी सूचनाएं और जानकारी हम देंगे
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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011
वैलेटाइन डे स्पेशल- बस प्यार की बातें
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
अच्छी सेक्स लाइफ से बढ़ता है प्यार
ब्लडप्रेशर में ना करें सेक्स
फलदायी है अशोक का पेड़
Rahul Tripathi
पार्कों में, स्कूलों में ओर अन्य सभी सार्वजनिक जगहों और घरों में अशोक का पेड व्यपक्ता के साथ पाया जाता
है। ऐसी मान्यता है कि इसे घर में लगााने या इसके जड को धारण करने से व्यक्ति को शोक नहीं होता तथा घर
में सुख समृद्धि आती है। इसे स्त्री निरीक्षणदोहक भी कहते हैं, क्योकि इसके सेवन से स्त्रियों के कई रोग मिट
जाते हैं और उनका सौन्दर्य में बृद्धि होती है। अशोक के क्या-क्या गुण है आइए जानते हैं-
सफलता के लिए
अशोक के एक पत्ती तोड कर सिर पर धारक कर लें। जिस काम को करने जा रहे हो वह निश्चित रूप से पूर्ण होगा।
धन संबंधी उपाय
अशोक वृक्ष की जड को विधिवत ग्रहण करने से कभी भी धन की कमी नही होती।आप चाहे इसकी जड को धन के स्थान पर रख सकते हैं। इससे घर में बरकत आती है।
दारिद्रता नाशक
दरिद्रता को नाश करने में यह वृक्ष सहायक है।इसके लिए अशो वृक्ष के फूल को प्रतिदिन पीस कर शहद के साथ मिला कर खाएं। कुछ दिन निरंतर खाते रहने से दरिद्रता का अंत हो जाएगा।हां इस दौरान धन देवी की पूा करते रहने चाहिए।शीर्घ ही इच्छा की पूर्ति होगी।
रोग नाशक
यदि अशोक के पेड की छाल उबाल कर उसके पानी को पिया जाए तो स्त्री के सारे रोग नष्ट हो जाएगे।इसके निरंतर प्रयोग से स्वास्थ्य सुधर जाता है और सौन्दर्य में निखार आता है।
चिंता नाशक
चिंता चिता की खान होती है लेकिन यदि रोजाना बासी मुॅह अशोक की तीन पत्ते खाए तो इस विकार से बचा जा
सकता है।
समस्त लाभसमस्त लाभ के लिएयदि अशो बीज को तांबे में भरकर ताबीज के रूप में धारण कियाा जाए तो लाभ प्राप्त होगा।
देवताओं को प्रसन्न करें
अशोक वृक्ष को काकुल वृक्ष माना जाता है अतः देवी-देवताओं पर इसे अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं ऐसा करने
से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011
एक लीटर में २४० किलोमीटर
आमिर खान की थ्री इडियटृस फिल्म कहती है कि यह देश आसाधरण प्रतिभाओं से भरा है। बस जरूरत है परंपरागत ढ़ाचे को बदलकर नई किरण जगाने की। इसी थीम पर थ््राी इडियट ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी पर इलाहाबाद के शैलेन्द्र कुमार सिंह गौड की प्रतिभा के मामले में फिल्म और जमीनी हकीकत में अंतर है। मिस्टर शैलेन्द्र ने अपनी मोटर साइकिल के इंजन में बदलाव कर उसकी माइलेज तीन गुना बढ ा दिया। इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सामने उन्होंने अपनी मौअर बाइक को एक लीटर में ९८ किमी चलाकर दिखाया भी हैंऔर इंस्टीट्यूट इसे प्रमाणित भी करती है। धुन के पक्के शैलन्द का दावा है कि उनके द्वारा विकसित इंजन ने फिलहाल सामान्य इंजन की अपेक्षा प्रतिलीटर २४० का माइलेज दिया है पर अगर किसी अच्छी प्रयोगशाला में इसे बनाया जाए तो यह आकड ा ३०० किमी प्रति लीटर तक आसानी से पहॅंच सकता है। शैलेन्द्र ने बताया कि सामान्य इंजन इंटरनल कंबस्टन इंजन में पिस्टन की गति वर्टिकल होती है जबकि उन्होंने अपने संशोधित इंजन में इसे होरिजेन्टल कर दिया है। इसके अलावा इंजन की कनेक्टिंग रॉड और कैं्रक में भी परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः इंटरनल कंबस्टन इंजन में ईधन का सिर्फ २६ प्रतिशत ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता हैं। जबकि उनके द्वारा निर्मित इंजन में ६० फीसदी तक ईधन गतिज ऊर्जा में तब्दील होता है। यदि इस तकनीकि को फॉलों किया जाए तो औसतन ५० से ६० फीसदी तेल की बचत आसानी से की जा सकती है। शैलेन्द्र ने अपने प्रोटोटाइप इंजन को पेटेन्ट करा लिया है और जल्द ही उसे अंतर्राष्टीय पेन्ट कराने के लिए अमेरिका भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
--आभार सप्ताहिक नई दुनिया स्नेह मधुर