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रविवार, 20 फ़रवरी 2011

टैगोर का नहीं रघुनाथ का राष्ट्रगान गा रहे बच्चे

अंबेडकर नगर अंबेडकर नगर जिले के उतरेथू बाजार स्थित एक निजी विद्यालय ने राष्ट्रगान की शब्दावली बदल डाली। प्रबंधक द्वारा संशोधित राष्ट्रगान पिछले एक माह से प्रार्थना के समय गाया जा रहा है। वहीं, एडीएम एसपी आनंद कहते हैं कि राष्ट्रगान में बदलाव अक्षम्य है। यह राष्ट्र का अपमान है। जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करेंगे। बीएसए राकेश कुमार का कहना है कि राष्ट्रगान में बदलाव की बात सही निकली तो विद्यालय की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित उतरेथू बाजार राहतनगर में लार्ड बुद्धा अंबेडकर अर्जक मिशन नामक पब्लिक स्कूल है। बेसिक शिक्षा परिषद से पांचवी तक मान्यता प्राप्त इस स्कूल में 400 बच्चे पंजीकृत हैं। तकरीबन एक माह पहले विद्यालय के प्रबंधक रघुनाथ सिंह ने राष्ट्रगान की कुछ पंक्तियों के शब्दों को बदल दिया। छात्र विद्यालय की प्रार्थना में अब संशोधित राष्ट्रगान गा रहे हैं। राष्ट्रगान की दूसरी पंक्ति में उल्लिखित अधिनायक शब्द की जगह उत्प्रेरक शब्द का उच्चारण हो रहा है, तीसरी पंक्ति के भारत भाग्य विधाता को बदले स्वरूप में स्वर्णिम भारत निर्माण कहा जा रहा है। तव शुभ आशिष मांगे को तब शुभ कामना मांगे गाया जा रहा है। अंत में जय हे के पश्चात जय लार्ड बुद्धा कहकर राष्ट्रगान समाप्त किया जाता है। प्रबंधक रघुनाथ सिंह ने राष्ट्रगान में संशोधन को राष्ट्र के प्रति निष्ठा व आजादी का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा, अधिनायक शब्द राजा को संबोधन के लिए था। अब हम स्वतंत्र हैं। प्रजातंत्र में अधिनायक शब्द के कोई मायने नहीं। वह अन्य शब्दों में भी बदलाव को सही बताते हैं। वे इसे राष्ट्र का अपमान नहीं बल्कि स्वाभिमान मानते हैं।

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कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश के बीच दस साल से लटके संपत्ति बंटवारे का ही नतीजा है कि स्कूल को मान्यता उत्तराखंड ने दी है और उसका संचालन कर रहा है यूपी का सिंचाई विभाग। परिसंपत्तियों को लेकर दोनों राज्यों के बीच की तनातनी का खामियाजा भुगत रहे हैं स्कूल में पढ़ने वाले 155 बच्चे, जिन्हें मिडडे मील के रूप में दो मुट्ठी चावल तक नसीब नहीं। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित कालागढ़ के रामगंगा परियोजना प्राथमिक विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में तकरीबन 155 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। कभी एशिया के सबसे बड़े स्कूल का तमगा पा चुके इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। 90 फीसदी बच्चे अनुसूचित जाति/जनजाति/ पिछड़ा वर्ग से हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार की मिडडे मील योजना का लाभ हासिल नहीं है, क्योंकि स्कूल दो राज्यों की कश्मकश का शिकार है। उत्तराखंड शिक्षा विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि उनके यहां से सिर्फ मान्यता दी गई है। जाहिर है मिड-डे मील उनकी जिम्मेदारी नहीं। यूपी सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि वे उप्र शासन को प्रस्ताव भेज चुके हैं कि स्कूल को शिक्षा विभाग अपने अधीन ले ले, लेकिन शासन से इसका कोई जवाब नहीं आया। बच्चों को क्या पता कि उनकी भाग्य विधाता बनीं सरकारें क्या गुल खिला रही हैं। बड़ों के बीच चल रहे मनमुटाव का

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

एकादशी को चावल न खाएं

एकादशी के दिन चावल न खाने के संदर्भ में यह जानना आवश्यक है कि चावल और अन्य अन्नों की खेती में क्या अंतर है। यह सर्वविदित है कि चावल की खेती के लिए सर्वाधिक जल की आवश्यकता होती है। एकादशी का व्रत इंद्रियों सहित मन के निग्रह के लिए किया जाता है। ऎसे में यह आवश्यक है कि उस वस्तु का कम से कम या बिलकुल नहीं उपभोग किया जाए जिसमें जलीय तत्व की मात्रा अधिक होती है। कारण-चंद्र का संबंध जल से है। वह जल को अपनी ओर आकर्षित करता है।
यदि व्रती चावल का भोजन करे तो चंद्रकिरणें उसके शरीर के संपूर्ण जलीय अंश को तरंगित करेंगी। परिणाम व्रत से गिर जाएगा या जिस एकाग्रता से उसे व्रत के अन्य कर्म-स्तुति पाठ जप श्रवण एवं पननादि करने थे; उन्हें सही प्रकार से नहीं कर पाएगा। ज्ञातव्य हो कि औषधि के साथ पथ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है।
क्यो करते हैं एकादशी का व्रत

आपने कई लोगों को एकादशी का व्रत करते हुए देखा होगा। लेकिन क्या आपको पता है एकादशी का व्रत क्यो किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है- कि आत्मा को रथी मानो, शरीर का रथ और बुद्धि को सारथी मानो। इनके संतुलित व्यवहार से ही श्रेय की प्राप्ती होती है। इसके लिए इन्द्रियों का वश में होना और मन पर लगाम होना आवश्यक है।
ऋषियौं ने इस इन्द्रियौं के बाद मन को भी ग्यारहवीं इन्द्रिय माना है। इसलिए इन्द्रियों की कुल संख्या 11 होती है। एकादशी तिथि के दिन यदि मनोनिग्रह की साधना की जाए तो वह सद्य: फलवती सिद्ध हो सकती है। इसी वैज्ञानिक आशय से ही एकादशेन्द्रियभूत मन को एकादशी तिथि के दिन धर्मानुष्ठान एवं व्रतोपवास द्वारा निग्रहीत करने का विधान किया गया है। अर्थात एकादशी व्रत करने का अर्थ है- अपनी इन्द्रियों पर निग्रह करना।

postmoderm

कानपुर पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पहुंचते ही भले ही हर कोई हवा में उड़ने वाली बदबू से बचने के लिए नाक पर रुमाल रख लेता हो, लेकिन जरा उन चिकित्सकों के बारे में सोचिए जो कई बार हफ्ते भर पुराने सड़े-गले शवों का पोस्टमार्टम कर सही तथ्यों तक पहुंचने का पुरजोर प्रयास करते हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण काम के लिए अगर मात्र दस रुपये भत्ता मिलता हो तो लापरवाही भरा रवैया आने से भला कौन रोक सकता है। सूबे में पिछले 26 वर्षो से चिकित्सकों को एक शव के पोस्टमार्टम का सिर्फ 10 रुपये भत्ता दिया जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार एक शव के पोस्टमार्टम के लिए अपनी सेवाओं में तैनात चिकित्सक को एक हजार रुपये भत्ता देती है। शवों के पोस्टमार्टम में इतना कम भत्ता मिलने के चलते पीएमएस संवर्ग के चिकित्सकों ने बीते एक दशक से यह भत्ता लेना ही बंद कर रखा है। नगर क्षेत्र में तैनात सरकारी चिकित्सकों की रोटेशन के आधार पर सीएमओ द्वारा पोस्टमार्टम ड्यूटी लगायी जाती है। लेकिन संबंधित चिकित्सकों द्वारा लंबे समय से भत्ता नहीं लेने के बावजूद अभी तक किसी भी जिम्मेदार ने इस मामले में कोई पहल नहीं की है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज से सम्बद्ध हैलट अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस में औसतन हर साल 3,200 शवों का पोस्टमार्टम किया जाता है। इस हिसाब से पिछले दस साल में चिकित्सकों का शवों के पोस्टमार्टम की मद में 32,000 रुपया बकाया है। पोस्टमार्टम भत्ते को लेकर सरकार की उदासीनता व उपेक्षा के बाद भी चिकित्सकों ने कभी किसी शव का पोस्टमार्टम करने से मना नहीं किया है। इस संबंध में उनका कहना है कि रिश्तेदार या करीबी की मौैत से यहां आने वाले परिजन पहले ही परेशान व मजबूर होते हैं। तकलीफ न हो, इसलिए कभी इस मुद्दे पर काम रोकने जैसा विचार ही नहीं आया। 1984 का शासनादेश न्यायिक प्रक्रिया में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए चिकित्सकों का भत्ता वर्ष 1984 के आदेश से निर्धारित किया गया था। उस समय पेट्रोल की कीमत छह रुपये प्रति लीटर थी जो अब 60 रुपये प्रति लीटर पहुंच गयी है। लेकिन भत्ता नहीं बढ़ा है, इसी कारण चिकित्सकों ने लेना बंद कर दिया है। -डॉ के स्वरूप, अध्यक्ष पीएमएस संवर्ग कानपुर। प्रति शव पोस्टमार्टम भत्ता।

वैश्याएं भी हुई फेसबुक की दीवानी

सोशल नेटवर्किग साइट का क्रेज इतना बढ़ता जा रहा है कि अब कॉलगर्ल भी इससे अछूती नहीं रही हैं। एक सर्वे में सामने आया है कि लगभग 83 प्रतिशत वैश्याओं के फेसबुक अकाउंट हैं और वे इसके जरिए ही अपने ग्राहकों को लुभा रही हैं।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी के प्रोफेसर सुधीर वेंकटेस ने हाल ही में एक सर्वे कराया जिसमें फेसबुकसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य सामने आए। सर्वे के मुताकि लगभग 83 प्रतिशत प्रोस्टिटयूट के फेसबुक अकाउंट है और वे इसके जरिए गब्राहकों को लुभाने की कोशिश करती हैं। वेंकटेश के मुतबिक इस साल के अंत तक फेसबुक सेक्स वर्कर के लिए सौदेबाजी का प्रमुख जरिया बन जाएगा। इस सर्वे को "वायर्ड" पत्रिका के फरवरी 2011 के अंक में छापा जाएगा।

सर्वे के अनुसार 2008 तक केवल 25 प्रतिशत कॉलगर्ल ही फेसबुक के जरिए अपने ग्राहकों की सेटिंग करती थी। लेकिन दो साल के भीतर ही इस आंकड़े मे जबरदस्त उछाल आया है। सर्वे के अनुसार वेश्यांए स्मार्टफोन के जरिए ही फेसबुक का इस्तेमाल करती हैं इनमें से लगभग 70 फीसदी वेश्याएं ब्लेकबेरी और लगभग 19 फीसदी एप्पल के स्मार्टफोन के जरिए फेसबुक का इस्तेमाल करती हैं।

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

दुनिया के 10 सबसे बड़े सेक्सबाज

'टाइम पत्रिका' की एक नई सूची से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और एक समय में उनकी महिला मित्र रही मोनिका लेविंस्की के चर्चे एक बार खास ओ आम की जबान पर आ सकते हैं। टाइम पत्रिका ने दुनिया के 10 सबसे बड़े सेक्सबाज नेताओं की सूची तैयार की है, जिसमें सातवें स्थान पर क्लिंटन को रखा गया है।

गौर करने वाली बात यह है कि आए दिन महिलाओं के साथ अपने संबंधों को लेकर सुखिर्यों में बने रहने वाले इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बलरुस्कोनी का नाम इस सूची में शामिल ही नहीं है, जबकि सूची जारी होने के दो दिन पहले ही मिस्र की जनक्रांति से प्रेरित होकर इटली की महिलाएँ रंगीनमिजाज बलरुस्कोनी के खिलाफ सड़कों पर उतर आईं थीं।


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‘टाइम’ की इस सूची में पहला स्थान साउथ कैरोलिना के पूर्व गवर्नर मार्क सैनफोर्ड को मिला है। 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में इस पद के प्रत्याशी माने जा रहे सैनफोर्ड के एक साल से अर्जेंटीना की एक महिला के साथ प्रेम संबंध थे।

दूसरे नंबर पर सीनेटर जॉन एनसाइन हैं, जिनका एक साल तक अपनी एक प्रचार कर्मचारी से प्रेम संबंध चला। सूची में तीसरा स्थान लुईसियाना के सीनेटर डेविड विटर ने पाया है, जो प्रांत की हाईप्रोफाइल कॉलगर्ल्स के नेटवर्क में काफी लोकप्रिय थे।

डेट्राइट के पूर्व मेयर क्वामे किलपैट्रिक ने इस सूची में चौथा स्थान बनाया है। मेयर के प्रांत की एक अधिकारी के साथ लंबे समय से संबंध थे। सीनेटर लैरी क्रेग को हवाईअड्डे के बाथरुम में एक महिला कर्मचारी के साथ अनुचित आचरण करने के लिए इस सूची में पाँचवे स्थान पर शामिल किया गया है। क्रेग ने अपना दोष स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

डेमोक्रेटिक सांसद बार्ने फ्रैंक के एक पुरुष सेक्सकर्मी के साथ संबंध उजागर होने के बाद उन्हें टाइम ने अपनी सूची में छठे स्थान पर रखा है। सूची में सातवाँ स्थान पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को मिला है, जिनके मोनिका लेविंस्की के साथ संबंध लिखित संदेशों के माध्यम से उजागर हुए थे।

टाइम ने सबसे बड़े सेक्स स्कैंडलबाजों की सूची में आठवें स्थान पर पूर्व सीनेटर और राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी गैरी हार्ट को रखा है। इस खुलासे के बाद हार्ट ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने की घोषणा कर दी। सूची के नौवें स्थान पर न्यूयार्क के पूर्व गवर्नर एलियोट स्पिट्जर काबिज हुए हैं, जो वेश्यावृत्ति का हाईप्रोफाइल धंधा चलाते थे।

टाइम की इस सूची में सबसे नीचे एक समय में राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रहे जॉन एडवर्डस हैं, जिनके एक उभरती हुई अभिनेत्री से संबंधों का 2008 में खुलासा हुआ। एडवर्डस को ‘पीपुल’ पत्रिका ने 2000 में ‘सबसे सेक्सी नेता’ चुना था।

शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

भारत की जनगणना

१ अप्रैल २०१० को भारत की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति की गिनती के साथ भारत की पन्द्रवी जनगणना आरंभ हो गई। इस बार जाति आधारित जनगणना कराई जाएगी। जो जून २०१० से सितम्बर २०११ तक चलेगी। १८७२ में से ही भारतीय जनगणना देश में जनसंखया आर्थिक गतिविधि, साक्षरता और शिक्षा, आवासीय गृह और घरेलू सुविधाओं, शहरीकरण, जन्म और मृत्युदर, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, भाषा, धर्म, पलायन, अपंगता और अनेक दूसरे सामाजिक-सांस्कृतिक जनसंखयीय आंकडों का स्त्रोत रही है। जनगणना में लोगों से पूछी गई व्यक्तिगत सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रखी जाती हैं कोर्ट भी इसमें दखल नही दे सकता। इस बार जनगणना का कार्य दो चरणों में हो रहा है। पहला चरण आवास सूची और आवास जनगणना का है। जो अप्रैल से जुलाई २०१० के बीच पूरा किया जाएगा। दूसरा चरण आबादी की गणना का है जो पूरे देश में एक साथ नौ से २८ फरवरी २०१० के बीच होगा। ३५ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ६४० जिलों, ५७६७ तहसीलों, ७७४२ कस्बों और छः लाख से अधिक गांवों मे यह जनगणना २५ लाख कर्मियों द्वारा की जाएगी। जनगणना में ६४ करोड़ जनगणना फार्म और ५० लाख निर्देश मैनुयल फार्म को छापने के लिए १२००० मैट्रिक टन कागज लगेगा। जनगणना फार्म १८ भाषाओं में छपेगें। भारत में जनगणना संविधान के जनगणना एक्ट १९४८ और जनगणना नियम १९९० के तहत की जाती है। युनीक आइडेंटीफिकेशन कार्ड २९ सितंबर २०१० को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माहराष्ट्र के नंदरबार जिले में तेभ्ली गांव में १० आदिवासियों को १२ अंकों का युनिक आइडेंटिफिकेशन कार्ड यानि यूआईडी नंबर वितरित कर इस योजना की शुरुआत की। इस परियोजना के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी हैं।

शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011

वैलेटाइन डे स्पेशल- बस प्यार की बातें

वेलेंटाइन डे का नवयुवकों और नवयुवतियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। वेलेंटाइन डे पर लोग अपने प्यार से अपने प्यार का इजहार करते हैं। वेलेंटाइन डे अब एक त्यौहार की तरह मनाश जाने लगा है। वेलेंटाइन डे पश्चिम की देने है। भारत में लोगों को पहले वेलेंटाइन डे के बारे में ज्यादा पता नहीं था। लेकिन पिछले कुछ सालों से भारत में भी वेलेंटाइन डे काफी लोकप्रिय हो गया है। वेलेंटाइन सप्ताह की शुरूआत 7 फरवरी से ही हो जाती है। 7 फरवरी रोज डे: 7 फरवरी को रोज डे मनाया जाता है। रोज डे के दिन सभी लोग अपने प्यार, दोस्तों या अपने चहेतों को गुलाब का फूल भेंट करते हैं। इस तरीके से एक दूसरे को गुलाब का फूल भेंट कर अपने रिश्ते की शुरूआत करते हैं। दोस्तों को पीले रंग का गुलाब दिया जाता है। यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो उसे लाल रंग का गुलाब देते हैं। यदि वह आपके गुलाब को सहर्ष स्विकार कर लेती है तो समझ लिजिए कि वह भी आपके साथ रिश्ता बढाने में रूचि रखती है। 8 फरवरी प्रपोज डे: 8 फरवरी को प्रपोज डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने प्यार का इजहार करते हैं। यदि आप भी किसी को पसंद करते हैं तो यह दिन आपके लिए बिल्कुल सही है। या आप किसी से दोस्ती करना चाहते हैं तो भी आप इस दिन अपनी भावनाऔं को सामने वाले तक पहुंचा सकते हैं। यदि आप किसी को पसंद करते है तो यह सही दिन है। इस दिन आप अपनी प्यार और दोस्ती की भावनाओं को उस तक पहुंचाएं। इस दिन आप उसे बताएं कि आपके जीवन में उसका क्या स्थान है। 9 फरवरी चॉकलेट डे: इस दिन चॉकलेट डे मनाया जाता है। चॉकलेट डे के दिन अपने दिन कील शुरूआत मीठे से करें। साथ ही अपने दोस्तों और अपने प्यार को चॉकलेट देकर अपने रिश्ते में मिठास घोलनी चाहिए। कहते हैं चॉकलेट से मीठा कुछ भी नहीं होता। साथ ही यह भी कहते हैं कि मीठा खाने से प्यार बढता है। तो आप भी अपने दोस्तों और प्यार को चॉकलेट देकर अपने रिश्तों में मिठास घोल लिजिए और प्यार बढाइए। 10 फरवरी टेडी डे: चॉकलेट डे के बाद आता है टेडी डे। टेडी बहुत ही कोमल होता है। जब आप इस दिन अपने प्यार को टेडी गिफ्ट करेंगे तो आपके दिल की बात अपने आप ही आपके साथी तक पहुंच जाएगी। इस दिन आप अपने साथी को अचछा सा टेडी गिफ्ट करें और अपने रिश्ते को उतना ही कोमल पर मजबूत बनाएं जितना एक टेडी होता है। 11 फरवरी प्रॉमिस डे: इस दिन लोग प्यार में कसमें खाते हैं, जिंदगी भर साथ निभाने का प्रोमिस करते हैं। इस दिन को आप भी अपने प्यार के साथ यादगार बना सकते हैं। इस दिन आप अपने प्यार को कुछ वादे करें और उन्हें ताउम्र निभाने का भी वादा करें। इस दिन आप अपने प्यार से भसी कुछ वादे ले सकते हैं। जैसे कि आई प्रोमिस यू आई विल लव यू टिल द एंड ऑफ माई लाइफ आदि। इससे आपका प्यार और ज्यादा गहरा हो जाएगा। साथ ही आपकी पार्टनर भी आपको पहले से ज्यादा प्यार करने लगेगी। 12 फरवरी किस डे: यह दिन बहुत ही खास है और इसके लिए आप बाजार से अपने प्यार के लिए कुछ अच्छा सा गिफ्ट खरीद सकते हैं। इस दिन आप अपने प्यार को किस करके अपने प्यार की गहराई समझा सकते हैं। आप अपने पार्टनर के हाथ को अपने हाथों में लेकर अपने प्यार की गहराई समझाते हुए उसके हाथ पर अपना लव मार्क छोड सकते हैं। ऎसा करने से आपकी पार्टनर को बहुत अच्छा लगता है। ध्यान रहे कहीं आप भावुकता में कोई बदतमिजी न कर बैठे। इसलिए अपनी मर्यादा में रहकर ही व्यवहार करें। 13 फरवरी हग डे: इस दिन आप अपने पार्टनर को जादू की झप्पी देकर अपनी भावनाओं से अवगत करा सकते हैं। इस दिन आप अपने साथी को हग करके उसे बताए कि आपके दिल में उसकी क्या जगह है। गले लगाने परेशानियां कम हो जाती हैं। इसलिए आप भी अपने पार्टनर को जादू की झप्पी देकर उसे उसकी पसंद का कोई अच्छा सा गिफ्ट दें। 14 फरवरी वेलेंटाइन डे: यह दिन सभी युवकों और युवतियों के लिए खस होता है। इस दिन आप अपने दिल की बात खुलकर कह सकते हैं। यदि आप अब तक अपने साथी को जिसे आप चाहते हैं उसे अपने दिल की बात नहीं कह पाएं है तो इस दिन अपने दिल की बात जरूर कहें। इस दिन अपने प्यार का इजहार जरूर करें और उसे एक अच्छा सा गिफ्ट जरूर दें। यदि उसके दिल में भी आपके लिए कुछ ऎसी ही भावनाएं हैं जैसी आपके मन में है तो वह आपको मना नहीं कर पाएंगी। मैने भी इसी दिन अपने प्यार का इजहार करते हुए अपनी प्रेमिका को कहा था कि विल यू बी माई वेलेंटाइन और उसने हां कर दी आज वह मेरी पार्टनर मेरी लाइफ पार्टनर बन चुकी है। तो आप भी अपने प्यार का इजहार करें। इस पूरे सप्ताह को आप अपने साथी के साथ मिलकर यादगार बनाएं । रोज डे से लेकर वेलेंटाइन डे तक हर दिन आपका खास दिन होगा। पूरे सप्ताह को अपनी जिंदगी का हसीन और यादगार सप्ताह बना लें।

गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

अच्छी सेक्स लाइफ से बढ़ता है प्यार

आप अपने पार्टनर से प्यार करते हैं तो सेक्स से परहेज ना करें, बल्कि सोचिए कि सेक्स लाइफ में ‍आप कितने और कैसे-कैसे रंग भर सकते हैं। छोटी-छोट‍ी बातें आपको लाइफ का चरम आनंद दे सकती हैं, बस अपने पार्टनर से कोमलता से पेश आइए, फिर देखिए सेक्स का असली मजा : डांस करें - स्वयं डांस करें या पार्टनर के साथ। चाहे नाचना आता है या नहीं, पर नाचें जरूर। क्योंकि नाचना क्रिएट करता है सेक्स अपील। यह आसान जरिया है लोगों से मिलने का। डांसिंग कॉन्फिडेंस बिल्ड करता है, जो आसान तरीका है लोगों से मिलने का। वर्क आउट - डेली वर्क आउट से सेक्सी बॉडी बनती है। इससे ज्यादा देर सेक्स करने की शक्ति मिलती है। इससे शरीर लचीला हो जाता है और आप ऐसे आसनों का भी आनंद उठा सकती हैं जिनके बारे में सिर्फ ख्वाब देखती हैं। म्यूजिक - हर प्रकार का म्यूजिक सेक्स ‍की क्रिया में आनंददायक साबित होता है। सेक्स क्रिया के दौरान म्यूजिक की रिदिम हेल्प करती है उसे इंजॉय करने में। म्यूजिक से सेक्स के लिए मूड क्रिएट होता है। गानों के बोल भावनाओं में तूफान ला सकते हैं। शेयर फैंटेसी - एक दूसरे को कम से कम अपनी एक फैंटेसी जरूर बताएँ। यदि शेयर करने के बाद उसे एक्सपेरीमेंट कर सकें, तो इससे बेहतर कुछ नहीं। संवाद - अपने पार्टनर को समझाएँ कि आपको हर संभव सैक्सुअल प्लेजर दें। कम्यूनिकेशन कीजिए, बिना टच किए हुए। आपको पता है सेक्स एक बेहतरीन एक्सरसाइज है इसे कुशलता से निभाना आना चाहिए।

ब्लडप्रेशर में ना करें सेक्स

सेक्स के समय बॉडी के प्रायवेट पार्ट्स को भी ज्यादा रक्त की जरूरत होती है इससे हार्टबीट तथा ब्लडप्रेशर बढ़ जाता है। इस समय ब्लडप्रेशर बढ़कर 150 मिलीमीटर मरकरी तक पहुँच सकता है। यदि पहले से ही ब्लडप्रेशर बढ़ा है तो यह 180 मिलीमीटर मरकरी के स्तर तक पहुँचता है। यदि उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लडप्रेशर के मरीज ब्लडप्रेशर पर प्रभावी नियंत्रण रखे बिना सेक्स करते हैं तो ब्लडप्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़कर एंजाइना,हार्ट अटैक व पेरेलीसिस की संभावना बढ़ा देता है। हृदय से धमनियों में निरंतर ब्लड सर्कूलेशन होता रहता है। ऊतकों, कोशिकाओं को पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए धमनियों में रक्त दबाव होता है। स्वस्थ वयस्क व्यक्ति में हृदय के संकुचन के समय सिस्टोलिक प्रेशर 100 से 140 मिलीमीटर मरकरी और हृदय जब संकुचित नहीं होता, तब डायस्टोलिक प्रेशर 60 से 90 मिलीमीटर मरकरी होता है। ब्लडप्रेशर हमेशा एक जैसा नहीं रहता यह बदलता रहता है। सोते समय कम हो जाता है, जबकि मानसिक तनाव, गुस्सा, चिंता, भोजन के बाद, शारीरिक श्रम, व्यायाम तथा सहवास के समय बढ़ जाता है। आराम करने से पुनः सामान्य स्तर पर आ जाता है। यदि किसी व्यक्ति का ब्लडप्रेशर लगातार सीमा से ज्यादा रहता है तो यह दशा उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लडप्रेशर कहलाती है। हाई ब्लडप्रेशर बहुत ही सामान्य समस्या है। आधुनिक तनावयुक्त जीवनशैली, खानपान तनाव, भागदौड़ में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि वयस्कों में करीब 10-12 प्रतिशत व्यक्ति तो इसी समस्या से ग्रस्त हैं। ऐसे मरीजों में रोग की प्रारंभिक दशा में कोई विशेष समस्याएँ नहीं होती। हाई ब्लडप्रेशर के कारण ज्यादा शक्ति से कार्य करना पड़ता है, इस कारण हृदय का आकार बढ़ जाता है। इसी वजह से हार्ट फेल्योर, एंजाइनर, हार्टअटैक आदि की संभावना बढ़ जाती है। हाई ब्लडप्रेशर के कारण शरीर के अनेक अंग जैसे गुर्दे, आँखें, क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। पक्षाघात होने की संभावना हो सकती है। मरीजों में यदि रक्तचाप पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो अनेक यौन समस्याएँ भी हो सकती हैं। सेक्स के समय शरीर में कैलोरी की जरूरत बढ़ जाती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए हृदय गति धीरे-धीरे 70-80 से बढ़कर 100-120 प्रति मिनट हो जाती है, जो चरमोत्कर्ष के समय 130-160 प्रति मिनट तक पहुँच जाती है। सेक्स की समाप्ति के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो जाती है। हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों को पति-पत्नी के अतिरिक्त अन्य से सेक्स रिलेशन नहीं बनाने चाहिए। ऐसा करने पर उत्तेजना और तनाव से ब्लडप्रेशर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। मरीज, रोग का निदान होने पर भी चिंतित व तनावग्रस्त रहते हैं, जिस कारण सेक्स पावर भी प्रभावित होती है। उच्च रक्तचाप के मरीज कामक्रीड़ा के समय शीघ्र थक जाते हैं। साँस भी फूलने लगती है, गंभीर रूप से हार्ट फेलेयर हो सकता है, एंजाइना व हार्ट अटैक भी हो सकता है। हाई ब्लडप्रेशर का प्रमुख कारण दीर्घकालीन मानसिक तनाव होता है, जिस के कारण यौन संबंधों से अरुचि, शीघ्रपतन या नपुंसकता की समस्या हो सकती है। साथ ही हाई ब्लडप्रेशर के अनेक मरीज रोग का पता लगाने पर भी चिंतित होकर तनावग्रस्त रहते हैं, जिस कारण सेक्स पावर प्रभावित होती है। यदि आप उच्च रक्तचाप के मरीज हैं तो अपनी आदतें बदलें, भोजन में परहेज करें। जीवन सुव्यवस्थित करें, तनावमुक्त रहें। दुर्व्यसनों को त्यागें। उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण रखें। यदि रक्तचाप ज्यादा है तो यौन संबंधों से बचें जब तक कि यह सामान्य न हो जाए। आप उच्च रक्तचाप की दवाओं का सेवन करते हैं और यौन क्षमता में कमी हो जाती है तो दवाएँ लेना बंद न करें। चिकित्सक को समस्या बताएँ। वह दवा की मात्रा घटा देगा या दवाएँ बदल देगा, जिससे यौन समस्याओं से बचाव हो सकेगा। उच्च रक्तचाप मे मरीज जिन्हें मदिरा, तंबाकू, सिगरेट आदि की लत है को इन चीजों का त्यागकर संतुलित भोजन करना चाहिए जिस में वसा और कैलोरी की मात्रा नियंत्रित हो। नमक इस्तेमाल न करें। यदि वजन ज्यादा है तो वजन कम करें। नियमित व्यायाम करें और तनावमुक्त हलके उच्च रक्तचाप पर नियंत्रण किया जा सकता है पर उच्च रक्तचाप के अनेक मरीजों को रोग पर नियंत्रण के लिए दवाओं का सेवन करना पड़ता है। उच्च रक्तचाप की अनेक औषधियाँ मरीजों की यौन क्षमता को प्रभावित करती हैं। इसके उपचार के लिए प्रयुक्त इंड्राल (प्रोपेनानाल), मिथाइल डोपर (एंडोमेंट) तथा मूत्र की मात्रा बढ़ाने की औषधियाँ हैं, जो यौन क्षमता घटाती हैं जबकि कुछ दवाएँ जैसे काप्टोप्रिल यौन क्षमता प्रभावित नहीं करतीं। --------------------------------------------------------------------------------- हनीमून तक करें सेक्स का इंतजार क्या आप खुशहाल शादी का रहस्य जानना चाहते हैं? यदि हाँ तो आपको चाहिए कि हनीमून तक सेक्स का इंतजार करें। शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि जो जोड़े पुराने तरीके से शादी करते हैं यानी जो हनीमून का आनंद देर से उठाते हैं उनकी शादी ज्यादा खुशहाल होती है और इससे न केवल उनका आपसी संबंध अच्छा होता है बल्कि यौन संबंध भी अच्छा रहता है। प्रमुख अध्ययनकर्ता ब्रिघम यंग विश्वविद्यालय के प्रो. डीन बस्बे ने कहा कि इस विषय पर ज्यादातर शोध व्यक्ति के यौन अनुभवों पर आधारित होते हैं न कि उसके समय पर। संबंधों में यौन क्रिया से बढ़कर कुछ चीजें होती है और हमने पाया कि जिन लोगों ने अधिक समय तक इंतजार किया उनके संबंधों का यौन पहलू ज्यादा खुशहाल रहा। अध्ययन के अनुसार हनीमून तक यौन संबंधों का इंतजार करने वालों का कहना था कि उनके आपसी संबंध ज्यादा स्थायी और संतोषजनक हैं जबकि शादी से पहले यौन संबंध बनाने वालों के बीच ये तत्व कम देखे गए।

फलदायी है अशोक का पेड़

Rahul Tripathi 

पार्कों में, स्कूलों में ओर अन्य सभी सार्वजनिक जगहों और घरों में अशोक का पेड व्यपक्ता के साथ पाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसे घर में लगााने या इसके जड को धारण करने से व्यक्ति को शोक नहीं होता तथा घर में सुख समृद्धि आती है। इसे स्त्री निरीक्षणदोहक भी कहते हैं, क्योकि इसके सेवन से स्त्रियों के कई रोग मिट जाते हैं और उनका सौन्दर्य में बृद्धि होती है। अशोक के क्या-क्या गुण है आइए जानते हैं- सफलता के लिए अशोक के एक पत्ती तोड कर सिर पर धारक कर लें। जिस काम को करने जा रहे हो वह निश्चित रूप से पूर्ण होगा। धन संबंधी उपाय अशोक वृक्ष की जड को विधिवत ग्रहण करने से कभी भी धन की कमी नही होती।आप चाहे इसकी जड को धन के स्थान पर रख सकते हैं। इससे घर में बरकत आती है। दारिद्रता नाशक दरिद्रता को नाश करने में यह वृक्ष सहायक है।इसके लिए अशो वृक्ष के फूल को प्रतिदिन पीस कर शहद के साथ मिला कर खाएं। कुछ दिन निरंतर खाते रहने से दरिद्रता का अंत हो जाएगा।हां इस दौरान धन देवी की पूा करते रहने चाहिए।शीर्घ ही इच्छा की पूर्ति होगी। रोग नाशक यदि अशोक के पेड की छाल उबाल कर उसके पानी को पिया जाए तो स्त्री के सारे रोग नष्ट हो जाएगे।इसके निरंतर प्रयोग से स्वास्थ्य सुधर जाता है और सौन्दर्य में निखार आता है। चिंता नाशक चिंता चिता की खान होती है लेकिन यदि रोजाना बासी मुॅह अशोक की तीन पत्ते खाए तो इस विकार से बचा जा सकता है। समस्त लाभसमस्त लाभ के लिएयदि अशो बीज को तांबे में भरकर ताबीज के रूप में धारण कियाा जाए तो लाभ प्राप्त होगा। देवताओं को प्रसन्न करें अशोक वृक्ष को काकुल वृक्ष माना जाता है अतः देवी-देवताओं पर इसे अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं ऐसा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

एक लीटर में २४० किलोमीटर

आमिर खान की थ्री इडियटृस फिल्म कहती है कि यह देश आसाधरण प्रतिभाओं से भरा है। बस जरूरत है परंपरागत ढ़ाचे को बदलकर नई किरण जगाने की। इसी थीम पर थ््राी इडियट ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी पर इलाहाबाद के शैलेन्द्र कुमार सिंह गौड की प्रतिभा के मामले में फिल्म और जमीनी हकीकत में अंतर है। मिस्टर शैलेन्द्र ने अपनी मोटर साइकिल के इंजन में बदलाव कर उसकी माइलेज तीन गुना बढ ा दिया। इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सामने उन्होंने अपनी मौअर बाइक को एक लीटर में ९८ किमी चलाकर दिखाया भी हैंऔर इंस्टीट्‌यूट इसे प्रमाणित भी करती है। धुन के पक्के शैलन्द का दावा है कि उनके द्वारा विकसित इंजन ने फिलहाल सामान्य इंजन की अपेक्षा प्रतिलीटर २४० का माइलेज दिया है पर अगर किसी अच्छी प्रयोगशाला में इसे बनाया जाए तो यह आकड ा ३०० किमी प्रति लीटर तक आसानी से पहॅंच सकता है। शैलेन्द्र ने बताया कि सामान्य इंजन इंटरनल कंबस्टन इंजन में पिस्टन की गति वर्टिकल होती है जबकि उन्होंने अपने संशोधित इंजन में इसे होरिजेन्टल कर दिया है। इसके अलावा इंजन की कनेक्टिंग रॉड और कैं्रक में भी परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः इंटरनल कंबस्टन इंजन में ईधन का सिर्फ २६ प्रतिशत ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता हैं। जबकि उनके द्वारा निर्मित इंजन में ६० फीसदी तक ईधन गतिज ऊर्जा में तब्दील होता है। यदि इस तकनीकि को फॉलों किया जाए तो औसतन ५० से ६० फीसदी तेल की बचत आसानी से की जा सकती है। शैलेन्द्र ने अपने प्रोटोटाइप इंजन को पेटेन्ट करा लिया है और जल्द ही उसे अंतर्राष्टीय पेन्ट कराने के लिए अमेरिका भेजने की तैयारी कर रहे हैं। --आभार सप्ताहिक नई दुनिया स्नेह मधुर

गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

'आदि मानव शाकाहारी भी थे'

आदि मानवों पर किए गए एक नए शोध के अनुसार आदिमानव (निएंडरथल) सब्ज़ियां पकाते थे और खाया करते थे. अमरीका में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें निएंडरथल मानवों के दांतों में पके हुए पौधों के अंश मिले हैं. यह पहला शोध है जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि आदिमानव अपने भोजन के लिए सिर्फ़ मांस पर ही निर्भर नहीं रहते थे बल्कि उनके भोजन की आदतें कहीं बेहतर थीं. यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज़ में छपा है. आम तौर पर लोगों में आदि मानवों के बारे में ये धारणा रही है कि वो मांसभक्षी थे और इस बारे में कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी मिल चुके हैं. अब उनकी हड्डियों की रासायनिक जांच के बाद मालूम चलता है कि वो सब्ज़ियां कम खाते थे या बिल्कुल ही नहीं खाते थे. इसी आधार पर कुछ लोगों का ये मानना था कि मांस भक्षण के कारण ही हिमकाल के दौरान बड़े जानवरों की तरह ये मानव भी बच नहीं पाए. हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे एलिसन ब्रुक्स, प्रोफेसर हालांकि अब दुनिया भर में निएंडरथल मानवों के अवशेषों की जांच रासायनिक जांच से मिले परिणामों को झुठलाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मानवों के दांतों की जांच के दौरान उसमें सब्ज़ियों के कुछ अंश मिले हैं जिसमें कुछ तो पके हुए हैं. निएंडरथल मानवों के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं वहां पौधे भी मिलते रहे हैं लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं था कि ये मानव वाकई सब्ज़ियां खाते थे. जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलिसन ब्रुक्स ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ‘‘हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे.’’

'आदि मानव शाकाहारी भी थे'

आदि मानवों पर किए गए एक नए शोध के अनुसार आदिमानव (निएंडरथल) सब्ज़ियां पकाते थे और खाया करते थे. अमरीका में शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्हें निएंडरथल मानवों के दांतों में पके हुए पौधों के अंश मिले हैं. यह पहला शोध है जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि आदिमानव अपने भोजन के लिए सिर्फ़ मांस पर ही निर्भर नहीं रहते थे बल्कि उनके भोजन की आदतें कहीं बेहतर थीं. यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंसेज़ में छपा है. आम तौर पर लोगों में आदि मानवों के बारे में ये धारणा रही है कि वो मांसभक्षी थे और इस बारे में कुछ परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी मिल चुके हैं. अब उनकी हड्डियों की रासायनिक जांच के बाद मालूम चलता है कि वो सब्ज़ियां कम खाते थे या बिल्कुल ही नहीं खाते थे. इसी आधार पर कुछ लोगों का ये मानना था कि मांस भक्षण के कारण ही हिमकाल के दौरान बड़े जानवरों की तरह ये मानव भी बच नहीं पाए. हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे एलिसन ब्रुक्स, प्रोफेसर हालांकि अब दुनिया भर में निएंडरथल मानवों के अवशेषों की जांच रासायनिक जांच से मिले परिणामों को झुठलाता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन मानवों के दांतों की जांच के दौरान उसमें सब्ज़ियों के कुछ अंश मिले हैं जिसमें कुछ तो पके हुए हैं. निएंडरथल मानवों के अवशेष जहां कहीं भी मिले हैं वहां पौधे भी मिलते रहे हैं लेकिन इस बात का प्रमाण नहीं था कि ये मानव वाकई सब्ज़ियां खाते थे. जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलिसन ब्रुक्स ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ‘‘हमें निएंडरथल साइट्स पर पौधे तो मिले हैं लेकिन ये नहीं पता था कि वो वाकई सब्ज़ियां खाते थे या नहीं. हां लेकिन अब तो लग रहा है कि उनके दांतों में सब्ज़ियों के अंश मिले हैं तो कह सकते हैं कि वो शाकाहारी भी थे.’’

दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर खतरनाक

दिन भर में दो घंटे से ज्यादा वक्त कंप्यूटर गेम्स खेलने या टीवी देखने में बिताने वाले बच्चे गंभीर मानसिक बीमारी के शिकार हो सकते हैं। दूसरे कामों में दिखाई गई सक्रियता भी उन्हें इस खतरे से नहीं बचा सकती। ब्रिटेन में हुए एक रिसर्च में ये बातें सामने आई हैं। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने 10 से 11 साल की उम्र वाले 1000 बच्चों पर रिसर्च करने के बाद इस सच्चाई का पता लगाया है। रिसर्च के लिए चुने गए बच्चों को सात दिनों तक एक सवालों की लिस्ट में आँकड़े भरने को कहा गया। इन सवालों में पूछा गया था कि कितने समय तक उन्होंने टीवी या कंप्यूटर देखा। इसके साथ ही उनसे उनकी मानसिक दशा के बारे में भी सवाल किए गए। बच्चों से उनकी भावनात्मक और व्यावहारिक दिक्कतों के साथ ही संगी साथियों के साथ संबंध निभाने में आने वाली दिक्कतों के बारे में भी पूछा गया। इस दौरान एक मशीन के जरिए उनकी शारीरिक सक्रियता को भी मापा गया। रिसर्च के बाद जो नतीजे आए उनसे पता चला कि जिन बच्चों ने दो घंटे से ज्यादा वक्त टीवी या कंप्यूटर के साथ बिताया, उनमें से 60 फीसदी से ज्यादा बच्चों को मनोवैज्ञानिक दिक्कतें पेश आ रही हैं। टीवी के सामने दो घंटे से कम वक्त बिताने वाले बच्चों में ये दिक्कतें नहीं थीं। रिसर्च करने वालों का कहना है कि इन समस्याओं पर बच्चों की आयु, लिंग, आर्थिक सामाजिक स्थिति और दूसरी चीजों का कोई असर नहीं था। इसके साथ ही बाकी समय में बच्चों की सक्रियता ने भी समस्याओं पर कोई असर नहीं डाला। रिसर्च करने वाले डॉक्टर एंगी पागे ने बताया कि हम जानते हैं कि शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता शरीर और मन दोनों के लिए अच्छी होती है, लेकिन इस बात के पक्के संकेत हैं कि ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहने के कारण नकारात्मक असर हो रहा है। इस बात के कोई प्रमाण नहीं कि अगर शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता खूब ज्यादा हो तो स्क्रीन के साथ थोड़ी ज्यादा देर तक चिपका रहा जा सकता है। रिसर्च करने वाले छात्रों ने ये जरूर देखा कि शारीरिक मेहनत नहीं करने वाले छात्रों में मनोवैज्ञानिक दिक्कतें और बढ़ जाती हैं अगर वो स्क्रीन के साथ ज्यादा समय बिता रहे हों। इसके मुकाबले पढ़ने या होमवर्क करने में वक्त बिताने वाले छात्रों में किसी तरह की मनोवैज्ञानिक दिक्कतों के पैदा होने के कोई संकेत नहीं मिले। 

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क्या इंटरनेट अमरीका के लिए भस्मासुर बन गया है? इंटरनेट का विकास अमरीका में हुआ लेकिन इन दिनों विकीलीक्स ने इंटरनेट पर लाखों गुप्त दस्तावेज़ प्रकाशित करके अमरीका को हिला कर रख दिया है. क्योंकि इंटरनेट पर लिखने के लिए अख़बार और टेलीविज़न जैसे संसाधन नहीं चाहिए. इसी वजह से विकीलीक्स ने ढाई लाख से ज़्यादा ऐसे गुप्त दस्तावेज़ जारी किए हैं जिन्हें दुनिया भर में फैले अमरीकी दूतावासों से भेजा गया था. इनसे ज़ाहिर होता है कि अपने सहयोगी देशों के बारे में अमरीका की सार्वजनिक और गुप्त राय में बहुत फ़र्क़ होता है. जनतंत्र, बोलने की आज़ादी और मीडिया की आज़ादी को अपना मूल सिद्धांत मानने वाली अमरीका और पश्चिमी देशों की सरकारें विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज से इस क़दर खार खा चुकी हैं कि उन्हें जेल भेजने और यहाँ तक कि उनकी हत्या करवा दिए जाने की बातें खुले आम की जा रही हैं. क्या जिस इंटरनेट को अमरीका की बौद्धिक ताक़त का प्रतीक माना जाता है वो अब अमरीका के गले की हड्डी बन गया है?

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

पशुओं में आक्सीटोसिन लगाने से मनुष्यों में बढते विकार

नीदरलैंड में एम्सर्टडम विश्विद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर दुधारू पशु से ज्यादा दूध लेने के लिए उसे 'ऑक्सीटोसिन' का इंजेक्शन दिया जाए तो उस दूध का सेवन करनेवाले में कई विकार पैदा हो सकते हैं. शोध के मुताबिक़ इस तरह के दूध के सेवन से अपने समुदाय और जाति को दूसरे से श्रेष्ठ समझने का भाव बलवती होता है. ये शोध हाल में अमरीकन एसोसिएशन ऑफ़ एडवांसमेंट ऑफ़ साइंस की पत्रिका 'प्रोसीडिंग्स नेशनल अकेडमी ऑफ़ साइंस' में प्रकाशित हुआ है. भारत में कई स्थानों पर दूध विक्रेता और पशुपालक अपने मवेशियों में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए नियमित तौर पर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं. मुझे लगता है हाल के वर्षो में जातीय विवाद और द्वंद जिस स्तर पर उभरा है उसमें इस तरह के दूध के इस्तेमाल ने मदद की होगी इस बात से पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है. प्रोफेसर नरपत शेखावत, वनस्पति शास्त्री जोधुपर स्थित जेएनवी विश्विद्यालय में वनस्पति विज्ञान के प्रमुख प्रोफ़ेसर नरपत शेखावत कहते है कि भारत में ऐसी दवाइयों पर लगाई गई रोक को सख्ती से पालन किया जाए क्योंकि हम एक जाति समुदायों वाले विविधपूर्ण समाज का हिस्सा हैं. नरपत शेखावत कहते हैं, ''मुझे लगता है हाल के वर्षो में जातीय विवाद और द्वंद जिस स्तर पर उभरा है उसमें इस तरह के दूध के इस्तेमाल ने मदद की होगी इस बात से पूरी तरह से इनकार नहीं किया जा सकता है.'' अब तक ऑक्सीटोसिन को ऐसा रसायन माना जाता था जो जानवरों में अपने बछड़े के प्रति प्रेम का भाव का पैदा करता है जिससे उसे ज़्यादा दूध उतरता था. लेकिन अब शोधकर्ताओं ने एक नई बात पाई है कि जहाँ ये अपने समुदाय के भीतर एक दूसरे के प्रति प्रेम और विश्वास को बढ़ावा देता है वहीं दूसरे समुदायों और जातियों के प्रति अविश्वास का भाव का निर्माण करता है. शोध के अनुसार दूसरे समुदायों के प्रति पूर्वाग्रह की धारणा उत्पन्न होने से जातीय झगडे़ बढ़ सकते हैं.

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना



राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद विनय कटियार बीत कई वर्षों से राम नगरी अयोध्या में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अपने सहयोगियों व साधु संतों के संग उन्होंने प्रयाग के संगम तअ पर माघ मास में चलने वाले कल्पवास की भांति कार्यक्रम आंरभ करा दिया है। श्री कटियार का यह तीसरा कल्पवास है इसकी शुरुआत आपने ही की। अयोध्या में पहले ऐसे अनुष्ठान नही होते थे। रेती पर अब टेंट और लकड ी के ट्‌टर और झोपड ी नुमा मकान बन धार्मिक लहर दौड पड ी है। इस वर्ष अनुष्ठान स्थल तक पहॅुचने के लिए पक्का मार्ग भी बनवाया गया है। कल्पवास की भांति विनय कटियार सालाना राम विवाह के अवसर पर बैण्ड बाजों के साथ नगर में लाव लश्कर के साथ राम बारात निकालते हैं तथा राम लीली में स्वयं दशरथ का पाठ कर पिता की रस्में अदा करते हैं। राम बारात के पावन अवसर पर राम भक्तों से पूरा अयोध्या राममय हो जाता है। सड कों पर बाराती ही बाराती नजर आते हैं। इस बार चैत्र शक संवत के प्रथम दिन को विक्रमादित्य महोत्सव का विशाल आयोजन कराया गया। कटियार द्वारा कराए जाने वाले ऐसे अनुष्ठानों से जहां दूर-दूर से श्रद्वालु अयोध्या पहॅुचते है वहीं नगर वासियों का अच्छी कमाई भी होती है। विनय कटियार ने शुरू की यह परंपरा अब अयोध्यावासियों के लिए वार्षिक परंपरा बन चुकी है।

बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना


राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद विनय कटियार बीत कई वर्षों से राम नगरी अयोध्या में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अपने सहयोगियों व साधु संतों के संग उन्होंने प्रयाग के संगम तअ पर माघ मास में चलने वाले कल्पवास की भांति कार्यक्रम आंरभ करा दिया है। श्री कटियार का यह तीसरा कल्पवास है इसकी शुरुआत आपने ही की। अयोध्या में पहले ऐसे अनुष्ठान नही होते थे। रेती पर अब टेंट और लकड ी के ट्‌टर और झोपड ी नुमा मकान बन धार्मिक लहर दौड पड ी है। इस वर्ष अनुष्ठान स्थल तक पहॅुचने के लिए पक्का मार्ग भी बनवाया गया है। कल्पवास की भांति विनय कटियार सालाना राम विवाह के अवसर पर बैण्ड बाजों के साथ नगर में लाव लश्कर के साथ राम बारात निकालते हैं तथा राम लीली में स्वयं दशरथ का पाठ कर पिता की रस्में अदा करते हैं। राम बारात के पावन अवसर पर राम भक्तों से पूरा अयोध्या राममय हो जाता है। सड कों पर बाराती ही बाराती नजर आते हैं। इस बार चैत्र शक संवत के प्रथम दिन को विक्रमादित्य महोत्सव का विशाल आयोजन कराया गया। कटियार द्वारा कराए जाने वाले ऐसे अनुष्ठानों से जहां दूर-दूर से श्रद्वालु अयोध्या पहॅुचते है वहीं नगर वासियों का अच्छी कमाई भी होती है। विनय कटियार ने शुरू की यह परंपरा अब अयोध्यावासियों के लिए वार्षिक परंपरा बन चुकी है।
Rahul tripathi
shanti nagar bilahur kanpur 209202
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बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना

बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद विनय कटियार बीत कई वर्षों से राम नगरी अयोध्या में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अपने सहयोगियों व साधु संतों के संग उन्होंने प्रयाग के संगम तअ पर माघ मास में चलने वाले कल्पवास की भांति कार्यक्रम आंरभ करा दिया है। श्री कटियार का यह तीसरा कल्पवास है इसकी शुरुआत आपने ही की। अयोध्या में पहले ऐसे अनुष्ठान नही होते थे। रेती पर अब टेंट और लकड ी के ट्‌टर और झोपड ी नुमा मकान बन धार्मिक लहर दौड पड ी है। इस वर्ष अनुष्ठान स्थल तक पहॅुचने के लिए पक्का मार्ग भी बनवाया गया है। कल्पवास की भांति विनय कटियार सालाना राम विवाह के अवसर पर बैण्ड बाजों के साथ नगर में लाव लश्कर के साथ राम बारात निकालते हैं तथा राम लीली में स्वयं दशरथ का पाठ कर पिता की रस्में अदा करते हैं। राम बारात के पावन अवसर पर राम भक्तों से पूरा अयोध्या राममय हो जाता है। सड कों पर बाराती ही बाराती नजर आते हैं। इस बार चैत्र शक संवत के प्रथम दिन को विक्रमादित्य महोत्सव का विशाल आयोजन कराया गया। कटियार द्वारा कराए जाने वाले ऐसे अनुष्ठानों से जहां दूर-दूर से श्रद्वालु अयोध्या पहॅुचते है वहीं नगर वासियों का अच्छी कमाई भी होती है। विनय कटियार ने शुरू की यह परंपरा अब अयोध्यावासियों के लिए वार्षिक परंपरा बन चुकी है।
Rahul tripathi
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RAHUL TRIPATHI BILHAUR

 

सोमवार, 31 जनवरी 2011

बढ़ी कमाई, निगल गई महंगाई

ऎसे समय जब खाने पीने की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं और खाद्य मुद्रास्फीति 15 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है तब एक संशोधित अनुमान में देश की प्रति व्यक्ति आय एक साल पहले के मुकाबले 14.5 प्रतिशत बढ़कर 46,492 रूपए सालाना हो
गई है।

सकल राष्ट्रीय आय को 117 करोड़ भारतीयों में बराबर बांटने पर प्रति व्यक्ति आय का यह आंकड़ा आया है। केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के ताजा अनुमान के अनुसार वर्तमान बाजार मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय के ये आंकड़े पिछले अनुमान की तुलना में करीब 2,000 रूपए अधिक हैं। इससे पहले 44,345 रूपए सालाना प्रति व्यक्ति आय का अनुमान लगाया गया था।

3875 रूपए मासिक
देश की जनसंख्या मार्च 2010 में 117 करोड़ हो गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2009-10 में देश की प्रति व्यक्ति आय इससे पिछले साल की तुलना में 14.5 प्रतिशत बढ़कर 46,492 रूपए हो गई। यह पूर्व वर्ष में औसतन 40,605 रूपए आंकी गई थी। मासिक आधार यह आय 3384 रूपए से बढ़कर 3875 रूपए प्रति माह बैठती है।

हालांकि, अगर 2004-05 की कीमतों के आधार पर गणना की जाए तो प्रति व्यक्ति आय में 2009-10 में केवल छह प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिलती है। इन कीमतों के आधार पर वित्त वर्ष 2010 में प्रति व्यक्ति आय 31,801 रूपए रही। मौजूदा कीमतों के आधार पर अर्थव्यवस्था का आकार बीते वित्त वर्ष में 16.1 प्रतिशत बढ़कर 61,33,230 करोड़ रूपए हो गया।