भारत प्यारा देश हमारा, इसकी सूचनाएं और जानकारी हम देंगे
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रविवार, 20 फ़रवरी 2011
टैगोर का नहीं रघुनाथ का राष्ट्रगान गा रहे बच्चे
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कोटद्वार (पौड़ी गढ़वाल) उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश के बीच दस साल से लटके संपत्ति बंटवारे का ही नतीजा है कि स्कूल को मान्यता उत्तराखंड ने दी है और उसका संचालन कर रहा है यूपी का सिंचाई विभाग। परिसंपत्तियों को लेकर दोनों राज्यों के बीच की तनातनी का खामियाजा भुगत रहे हैं स्कूल में पढ़ने वाले 155 बच्चे, जिन्हें मिडडे मील के रूप में दो मुट्ठी चावल तक नसीब नहीं। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित कालागढ़ के रामगंगा परियोजना प्राथमिक विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में तकरीबन 155 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। कभी एशिया के सबसे बड़े स्कूल का तमगा पा चुके इस विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। 90 फीसदी बच्चे अनुसूचित जाति/जनजाति/ पिछड़ा वर्ग से हैं, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार की मिडडे मील योजना का लाभ हासिल नहीं है, क्योंकि स्कूल दो राज्यों की कश्मकश का शिकार है। उत्तराखंड शिक्षा विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि उनके यहां से सिर्फ मान्यता दी गई है। जाहिर है मिड-डे मील उनकी जिम्मेदारी नहीं। यूपी सिंचाई विभाग के अफसरों का कहना है कि वे उप्र शासन को प्रस्ताव भेज चुके हैं कि स्कूल को शिक्षा विभाग अपने अधीन ले ले, लेकिन शासन से इसका कोई जवाब नहीं आया। बच्चों को क्या पता कि उनकी भाग्य विधाता बनीं सरकारें क्या गुल खिला रही हैं। बड़ों के बीच चल रहे मनमुटाव का
बुधवार, 16 फ़रवरी 2011
एकादशी को चावल न खाएं
यदि व्रती चावल का भोजन करे तो चंद्रकिरणें उसके शरीर के संपूर्ण जलीय अंश को तरंगित करेंगी। परिणाम व्रत से गिर जाएगा या जिस एकाग्रता से उसे व्रत के अन्य कर्म-स्तुति पाठ जप श्रवण एवं पननादि करने थे; उन्हें सही प्रकार से नहीं कर पाएगा। ज्ञातव्य हो कि औषधि के साथ पथ्य का भी ध्यान रखना आवश्यक होता है।
क्यो करते हैं एकादशी का व्रत
आपने कई लोगों को एकादशी का व्रत करते हुए देखा होगा। लेकिन क्या आपको पता है एकादशी का व्रत क्यो किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है- कि आत्मा को रथी मानो, शरीर का रथ और बुद्धि को सारथी मानो। इनके संतुलित व्यवहार से ही श्रेय की प्राप्ती होती है। इसके लिए इन्द्रियों का वश में होना और मन पर लगाम होना आवश्यक है।
ऋषियौं ने इस इन्द्रियौं के बाद मन को भी ग्यारहवीं इन्द्रिय माना है। इसलिए इन्द्रियों की कुल संख्या 11 होती है। एकादशी तिथि के दिन यदि मनोनिग्रह की साधना की जाए तो वह सद्य: फलवती सिद्ध हो सकती है। इसी वैज्ञानिक आशय से ही एकादशेन्द्रियभूत मन को एकादशी तिथि के दिन धर्मानुष्ठान एवं व्रतोपवास द्वारा निग्रहीत करने का विधान किया गया है। अर्थात एकादशी व्रत करने का अर्थ है- अपनी इन्द्रियों पर निग्रह करना।
postmoderm
वैश्याएं भी हुई फेसबुक की दीवानी
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी के प्रोफेसर सुधीर वेंकटेस ने हाल ही में एक सर्वे कराया जिसमें फेसबुकसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य सामने आए। सर्वे के मुताकि लगभग 83 प्रतिशत प्रोस्टिटयूट के फेसबुक अकाउंट है और वे इसके जरिए गब्राहकों को लुभाने की कोशिश करती हैं। वेंकटेश के मुतबिक इस साल के अंत तक फेसबुक सेक्स वर्कर के लिए सौदेबाजी का प्रमुख जरिया बन जाएगा। इस सर्वे को "वायर्ड" पत्रिका के फरवरी 2011 के अंक में छापा जाएगा।
सर्वे के अनुसार 2008 तक केवल 25 प्रतिशत कॉलगर्ल ही फेसबुक के जरिए अपने ग्राहकों की सेटिंग करती थी। लेकिन दो साल के भीतर ही इस आंकड़े मे जबरदस्त उछाल आया है। सर्वे के अनुसार वेश्यांए स्मार्टफोन के जरिए ही फेसबुक का इस्तेमाल करती हैं इनमें से लगभग 70 फीसदी वेश्याएं ब्लेकबेरी और लगभग 19 फीसदी एप्पल के स्मार्टफोन के जरिए फेसबुक का इस्तेमाल करती हैं।
मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011
दुनिया के 10 सबसे बड़े सेक्सबाज
गौर करने वाली बात यह है कि आए दिन महिलाओं के साथ अपने संबंधों को लेकर सुखिर्यों में बने रहने वाले इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बलरुस्कोनी का नाम इस सूची में शामिल ही नहीं है, जबकि सूची जारी होने के दो दिन पहले ही मिस्र की जनक्रांति से प्रेरित होकर इटली की महिलाएँ रंगीनमिजाज बलरुस्कोनी के खिलाफ सड़कों पर उतर आईं थीं।
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‘टाइम’ की इस सूची में पहला स्थान साउथ कैरोलिना के पूर्व गवर्नर मार्क सैनफोर्ड को मिला है। 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में इस पद के प्रत्याशी माने जा रहे सैनफोर्ड के एक साल से अर्जेंटीना की एक महिला के साथ प्रेम संबंध थे।
दूसरे नंबर पर सीनेटर जॉन एनसाइन हैं, जिनका एक साल तक अपनी एक प्रचार कर्मचारी से प्रेम संबंध चला। सूची में तीसरा स्थान लुईसियाना के सीनेटर डेविड विटर ने पाया है, जो प्रांत की हाईप्रोफाइल कॉलगर्ल्स के नेटवर्क में काफी लोकप्रिय थे।
डेट्राइट के पूर्व मेयर क्वामे किलपैट्रिक ने इस सूची में चौथा स्थान बनाया है। मेयर के प्रांत की एक अधिकारी के साथ लंबे समय से संबंध थे। सीनेटर लैरी क्रेग को हवाईअड्डे के बाथरुम में एक महिला कर्मचारी के साथ अनुचित आचरण करने के लिए इस सूची में पाँचवे स्थान पर शामिल किया गया है। क्रेग ने अपना दोष स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
डेमोक्रेटिक सांसद बार्ने फ्रैंक के एक पुरुष सेक्सकर्मी के साथ संबंध उजागर होने के बाद उन्हें टाइम ने अपनी सूची में छठे स्थान पर रखा है। सूची में सातवाँ स्थान पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को मिला है, जिनके मोनिका लेविंस्की के साथ संबंध लिखित संदेशों के माध्यम से उजागर हुए थे।
टाइम ने सबसे बड़े सेक्स स्कैंडलबाजों की सूची में आठवें स्थान पर पूर्व सीनेटर और राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी गैरी हार्ट को रखा है। इस खुलासे के बाद हार्ट ने राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने की घोषणा कर दी। सूची के नौवें स्थान पर न्यूयार्क के पूर्व गवर्नर एलियोट स्पिट्जर काबिज हुए हैं, जो वेश्यावृत्ति का हाईप्रोफाइल धंधा चलाते थे।
टाइम की इस सूची में सबसे नीचे एक समय में राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रहे जॉन एडवर्डस हैं, जिनके एक उभरती हुई अभिनेत्री से संबंधों का 2008 में खुलासा हुआ। एडवर्डस को ‘पीपुल’ पत्रिका ने 2000 में ‘सबसे सेक्सी नेता’ चुना था।
शनिवार, 12 फ़रवरी 2011
भारत की जनगणना
२९ सितंबर २०१० को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माहराष्ट्र के नंदरबार जिले में तेभ्ली गांव में १० आदिवासियों को
१२ अंकों का युनिक आइडेंटिफिकेशन कार्ड यानि यूआईडी नंबर वितरित कर इस योजना की शुरुआत की। इस
परियोजना के अध्यक्ष नंदन नीलेकणी हैं।शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2011
वैलेटाइन डे स्पेशल- बस प्यार की बातें
गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011
अच्छी सेक्स लाइफ से बढ़ता है प्यार
ब्लडप्रेशर में ना करें सेक्स
फलदायी है अशोक का पेड़
Rahul Tripathi
पार्कों में, स्कूलों में ओर अन्य सभी सार्वजनिक जगहों और घरों में अशोक का पेड व्यपक्ता के साथ पाया जाता
है। ऐसी मान्यता है कि इसे घर में लगााने या इसके जड को धारण करने से व्यक्ति को शोक नहीं होता तथा घर
में सुख समृद्धि आती है। इसे स्त्री निरीक्षणदोहक भी कहते हैं, क्योकि इसके सेवन से स्त्रियों के कई रोग मिट
जाते हैं और उनका सौन्दर्य में बृद्धि होती है। अशोक के क्या-क्या गुण है आइए जानते हैं-
सफलता के लिए
अशोक के एक पत्ती तोड कर सिर पर धारक कर लें। जिस काम को करने जा रहे हो वह निश्चित रूप से पूर्ण होगा।
धन संबंधी उपाय
अशोक वृक्ष की जड को विधिवत ग्रहण करने से कभी भी धन की कमी नही होती।आप चाहे इसकी जड को धन के स्थान पर रख सकते हैं। इससे घर में बरकत आती है।
दारिद्रता नाशक
दरिद्रता को नाश करने में यह वृक्ष सहायक है।इसके लिए अशो वृक्ष के फूल को प्रतिदिन पीस कर शहद के साथ मिला कर खाएं। कुछ दिन निरंतर खाते रहने से दरिद्रता का अंत हो जाएगा।हां इस दौरान धन देवी की पूा करते रहने चाहिए।शीर्घ ही इच्छा की पूर्ति होगी।
रोग नाशक
यदि अशोक के पेड की छाल उबाल कर उसके पानी को पिया जाए तो स्त्री के सारे रोग नष्ट हो जाएगे।इसके निरंतर प्रयोग से स्वास्थ्य सुधर जाता है और सौन्दर्य में निखार आता है।
चिंता नाशक
चिंता चिता की खान होती है लेकिन यदि रोजाना बासी मुॅह अशोक की तीन पत्ते खाए तो इस विकार से बचा जा
सकता है।
समस्त लाभसमस्त लाभ के लिएयदि अशो बीज को तांबे में भरकर ताबीज के रूप में धारण कियाा जाए तो लाभ प्राप्त होगा।
देवताओं को प्रसन्न करें
अशोक वृक्ष को काकुल वृक्ष माना जाता है अतः देवी-देवताओं पर इसे अर्पण करने से वे प्रसन्न होते हैं ऐसा करने
से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011
एक लीटर में २४० किलोमीटर
आमिर खान की थ्री इडियटृस फिल्म कहती है कि यह देश आसाधरण प्रतिभाओं से भरा है। बस जरूरत है परंपरागत ढ़ाचे को बदलकर नई किरण जगाने की। इसी थीम पर थ््राी इडियट ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी पर इलाहाबाद के शैलेन्द्र कुमार सिंह गौड की प्रतिभा के मामले में फिल्म और जमीनी हकीकत में अंतर है। मिस्टर शैलेन्द्र ने अपनी मोटर साइकिल के इंजन में बदलाव कर उसकी माइलेज तीन गुना बढ ा दिया। इलाहाबाद के मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सामने उन्होंने अपनी मौअर बाइक को एक लीटर में ९८ किमी चलाकर दिखाया भी हैंऔर इंस्टीट्यूट इसे प्रमाणित भी करती है। धुन के पक्के शैलन्द का दावा है कि उनके द्वारा विकसित इंजन ने फिलहाल सामान्य इंजन की अपेक्षा प्रतिलीटर २४० का माइलेज दिया है पर अगर किसी अच्छी प्रयोगशाला में इसे बनाया जाए तो यह आकड ा ३०० किमी प्रति लीटर तक आसानी से पहॅंच सकता है। शैलेन्द्र ने बताया कि सामान्य इंजन इंटरनल कंबस्टन इंजन में पिस्टन की गति वर्टिकल होती है जबकि उन्होंने अपने संशोधित इंजन में इसे होरिजेन्टल कर दिया है। इसके अलावा इंजन की कनेक्टिंग रॉड और कैं्रक में भी परिवर्तन किया गया है। सामान्यतः इंटरनल कंबस्टन इंजन में ईधन का सिर्फ २६ प्रतिशत ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता हैं। जबकि उनके द्वारा निर्मित इंजन में ६० फीसदी तक ईधन गतिज ऊर्जा में तब्दील होता है। यदि इस तकनीकि को फॉलों किया जाए तो औसतन ५० से ६० फीसदी तेल की बचत आसानी से की जा सकती है। शैलेन्द्र ने अपने प्रोटोटाइप इंजन को पेटेन्ट करा लिया है और जल्द ही उसे अंतर्राष्टीय पेन्ट कराने के लिए अमेरिका भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
--आभार सप्ताहिक नई दुनिया स्नेह मधुर
गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011
'आदि मानव शाकाहारी भी थे'
'आदि मानव शाकाहारी भी थे'
दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर खतरनाक
दिन भर में दो घंटे से ज्यादा वक्त कंप्यूटर गेम्स खेलने या टीवी देखने में बिताने वाले बच्चे गंभीर मानसिक बीमारी के शिकार हो सकते हैं। दूसरे कामों में दिखाई गई सक्रियता भी उन्हें इस खतरे से नहीं बचा सकती। ब्रिटेन में हुए एक रिसर्च में ये बातें सामने आई हैं। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने 10 से 11 साल की उम्र वाले 1000 बच्चों पर रिसर्च करने के बाद इस सच्चाई का पता लगाया है। रिसर्च के लिए चुने गए बच्चों को सात दिनों तक एक सवालों की लिस्ट में आँकड़े भरने को कहा गया। इन सवालों में पूछा गया था कि कितने समय तक उन्होंने टीवी या कंप्यूटर देखा। इसके साथ ही उनसे उनकी मानसिक दशा के बारे में भी सवाल किए गए। बच्चों से उनकी भावनात्मक और व्यावहारिक दिक्कतों के साथ ही संगी साथियों के साथ संबंध निभाने में आने वाली दिक्कतों के बारे में भी पूछा गया। इस दौरान एक मशीन के जरिए उनकी शारीरिक सक्रियता को भी मापा गया। रिसर्च के बाद जो नतीजे आए उनसे पता चला कि जिन बच्चों ने दो घंटे से ज्यादा वक्त टीवी या कंप्यूटर के साथ बिताया, उनमें से 60 फीसदी से ज्यादा बच्चों को मनोवैज्ञानिक दिक्कतें पेश आ रही हैं। टीवी के सामने दो घंटे से कम वक्त बिताने वाले बच्चों में ये दिक्कतें नहीं थीं। रिसर्च करने वालों का कहना है कि इन समस्याओं पर बच्चों की आयु, लिंग, आर्थिक सामाजिक स्थिति और दूसरी चीजों का कोई असर नहीं था। इसके साथ ही बाकी समय में बच्चों की सक्रियता ने भी समस्याओं पर कोई असर नहीं डाला। रिसर्च करने वाले डॉक्टर एंगी पागे ने बताया कि हम जानते हैं कि शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता शरीर और मन दोनों के लिए अच्छी होती है, लेकिन इस बात के पक्के संकेत हैं कि ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहने के कारण नकारात्मक असर हो रहा है। इस बात के कोई प्रमाण नहीं कि अगर शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता खूब ज्यादा हो तो स्क्रीन के साथ थोड़ी ज्यादा देर तक चिपका रहा जा सकता है। रिसर्च करने वाले छात्रों ने ये जरूर देखा कि शारीरिक मेहनत नहीं करने वाले छात्रों में मनोवैज्ञानिक दिक्कतें और बढ़ जाती हैं अगर वो स्क्रीन के साथ ज्यादा समय बिता रहे हों। इसके मुकाबले पढ़ने या होमवर्क करने में वक्त बिताने वाले छात्रों में किसी तरह की मनोवैज्ञानिक दिक्कतों के पैदा होने के कोई संकेत नहीं मिले।
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क्या इंटरनेट अमरीका के लिए भस्मासुर बन गया है? इंटरनेट का विकास अमरीका में हुआ लेकिन इन दिनों विकीलीक्स ने इंटरनेट पर लाखों गुप्त दस्तावेज़ प्रकाशित करके अमरीका को हिला कर रख दिया है. क्योंकि इंटरनेट पर लिखने के लिए अख़बार और टेलीविज़न जैसे संसाधन नहीं चाहिए. इसी वजह से विकीलीक्स ने ढाई लाख से ज़्यादा ऐसे गुप्त दस्तावेज़ जारी किए हैं जिन्हें दुनिया भर में फैले अमरीकी दूतावासों से भेजा गया था. इनसे ज़ाहिर होता है कि अपने सहयोगी देशों के बारे में अमरीका की सार्वजनिक और गुप्त राय में बहुत फ़र्क़ होता है. जनतंत्र, बोलने की आज़ादी और मीडिया की आज़ादी को अपना मूल सिद्धांत मानने वाली अमरीका और पश्चिमी देशों की सरकारें विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज से इस क़दर खार खा चुकी हैं कि उन्हें जेल भेजने और यहाँ तक कि उनकी हत्या करवा दिए जाने की बातें खुले आम की जा रही हैं. क्या जिस इंटरनेट को अमरीका की बौद्धिक ताक़त का प्रतीक माना जाता है वो अब अमरीका के गले की हड्डी बन गया है?
बुधवार, 2 फ़रवरी 2011
पशुओं में आक्सीटोसिन लगाने से मनुष्यों में बढते विकार
मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011
बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद विनय कटियार बीत कई वर्षों से राम नगरी अयोध्या में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अपने सहयोगियों व साधु संतों के संग उन्होंने प्रयाग के संगम तअ पर माघ मास में चलने वाले कल्पवास की भांति कार्यक्रम आंरभ करा दिया है। श्री कटियार का यह तीसरा कल्पवास है इसकी शुरुआत आपने ही की। अयोध्या में पहले ऐसे अनुष्ठान नही होते थे। रेती पर अब टेंट और लकड ी के ट्टर और झोपड ी नुमा मकान बन धार्मिक लहर दौड पड ी है। इस वर्ष अनुष्ठान स्थल तक पहॅुचने के लिए पक्का मार्ग भी बनवाया गया है। कल्पवास की भांति विनय कटियार सालाना राम विवाह के अवसर पर बैण्ड बाजों के साथ नगर में लाव लश्कर के साथ राम बारात निकालते हैं तथा राम लीली में स्वयं दशरथ का पाठ कर पिता की रस्में अदा करते हैं। राम बारात के पावन अवसर पर राम भक्तों से पूरा अयोध्या राममय हो जाता है। सड कों पर बाराती ही बाराती नजर आते हैं। इस बार चैत्र शक संवत के प्रथम दिन को विक्रमादित्य महोत्सव का विशाल आयोजन कराया गया। कटियार द्वारा कराए जाने वाले ऐसे अनुष्ठानों से जहां दूर-दूर से श्रद्वालु अयोध्या पहॅुचते है वहीं नगर वासियों का अच्छी कमाई भी होती है। विनय कटियार ने शुरू की यह परंपरा अब अयोध्यावासियों के लिए वार्षिक परंपरा बन चुकी है।
बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद विनय कटियार बीत कई वर्षों से राम नगरी अयोध्या में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अपने सहयोगियों व साधु संतों के संग उन्होंने प्रयाग के संगम तअ पर माघ मास में चलने वाले कल्पवास की भांति कार्यक्रम आंरभ करा दिया है। श्री कटियार का यह तीसरा कल्पवास है इसकी शुरुआत आपने ही की। अयोध्या में पहले ऐसे अनुष्ठान नही होते थे। रेती पर अब टेंट और लकड ी के ट्टर और झोपड ी नुमा मकान बन धार्मिक लहर दौड पड ी है। इस वर्ष अनुष्ठान स्थल तक पहॅुचने के लिए पक्का मार्ग भी बनवाया गया है। कल्पवास की भांति विनय कटियार सालाना राम विवाह के अवसर पर बैण्ड बाजों के साथ नगर में लाव लश्कर के साथ राम बारात निकालते हैं तथा राम लीली में स्वयं दशरथ का पाठ कर पिता की रस्में अदा करते हैं। राम बारात के पावन अवसर पर राम भक्तों से पूरा अयोध्या राममय हो जाता है। सड कों पर बाराती ही बाराती नजर आते हैं। इस बार चैत्र शक संवत के प्रथम दिन को विक्रमादित्य महोत्सव का विशाल आयोजन कराया गया। कटियार द्वारा कराए जाने वाले ऐसे अनुष्ठानों से जहां दूर-दूर से श्रद्वालु अयोध्या पहॅुचते है वहीं नगर वासियों का अच्छी कमाई भी होती है। विनय कटियार ने शुरू की यह परंपरा अब अयोध्यावासियों के लिए वार्षिक परंपरा बन चुकी है।
Rahul tripathi
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बजरंगी का अनुष्ठान अयोध्या की परंपरा बना
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सांसद विनय कटियार बीत कई वर्षों से राम नगरी अयोध्या में कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अपने सहयोगियों व साधु संतों के संग उन्होंने प्रयाग के संगम तअ पर माघ मास में चलने वाले कल्पवास की भांति कार्यक्रम आंरभ करा दिया है। श्री कटियार का यह तीसरा कल्पवास है इसकी शुरुआत आपने ही की। अयोध्या में पहले ऐसे अनुष्ठान नही होते थे। रेती पर अब टेंट और लकड ी के ट्टर और झोपड ी नुमा मकान बन धार्मिक लहर दौड पड ी है। इस वर्ष अनुष्ठान स्थल तक पहॅुचने के लिए पक्का मार्ग भी बनवाया गया है। कल्पवास की भांति विनय कटियार सालाना राम विवाह के अवसर पर बैण्ड बाजों के साथ नगर में लाव लश्कर के साथ राम बारात निकालते हैं तथा राम लीली में स्वयं दशरथ का पाठ कर पिता की रस्में अदा करते हैं। राम बारात के पावन अवसर पर राम भक्तों से पूरा अयोध्या राममय हो जाता है। सड कों पर बाराती ही बाराती नजर आते हैं। इस बार चैत्र शक संवत के प्रथम दिन को विक्रमादित्य महोत्सव का विशाल आयोजन कराया गया। कटियार द्वारा कराए जाने वाले ऐसे अनुष्ठानों से जहां दूर-दूर से श्रद्वालु अयोध्या पहॅुचते है वहीं नगर वासियों का अच्छी कमाई भी होती है। विनय कटियार ने शुरू की यह परंपरा अब अयोध्यावासियों के लिए वार्षिक परंपरा बन चुकी है।
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सोमवार, 31 जनवरी 2011
बढ़ी कमाई, निगल गई महंगाई
गई है।
सकल राष्ट्रीय आय को 117 करोड़ भारतीयों में बराबर बांटने पर प्रति व्यक्ति आय का यह आंकड़ा आया है। केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के ताजा अनुमान के अनुसार वर्तमान बाजार मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय के ये आंकड़े पिछले अनुमान की तुलना में करीब 2,000 रूपए अधिक हैं। इससे पहले 44,345 रूपए सालाना प्रति व्यक्ति आय का अनुमान लगाया गया था।
3875 रूपए मासिक
देश की जनसंख्या मार्च 2010 में 117 करोड़ हो गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2009-10 में देश की प्रति व्यक्ति आय इससे पिछले साल की तुलना में 14.5 प्रतिशत बढ़कर 46,492 रूपए हो गई। यह पूर्व वर्ष में औसतन 40,605 रूपए आंकी गई थी। मासिक आधार यह आय 3384 रूपए से बढ़कर 3875 रूपए प्रति माह बैठती है।
हालांकि, अगर 2004-05 की कीमतों के आधार पर गणना की जाए तो प्रति व्यक्ति आय में 2009-10 में केवल छह प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिलती है। इन कीमतों के आधार पर वित्त वर्ष 2010 में प्रति व्यक्ति आय 31,801 रूपए रही। मौजूदा कीमतों के आधार पर अर्थव्यवस्था का आकार बीते वित्त वर्ष में 16.1 प्रतिशत बढ़कर 61,33,230 करोड़ रूपए हो गया।
रविवार, 30 जनवरी 2011
मोबाइल जमाना नवयुवकों को भाया
मोबाइल महिमा आज देद्गा में चरम पर है और यही कारण है कि देद्गा का लगभग ६० प्रतिद्गात युवा संचार क्रान्ति के 'पालने' में झूल रहा है। युवाओं में मोबाइल स्टाइल सिम्बल बन चुका है। मोबाइल सेवा प्रदाता कम्पनियां भी युवाओं को ध्यान में रखते हुए आद्युनिक, किफायती और रुचिपूर्ण सेवांए बाजार में पेद्गा कर रहे हैैं जिससे युवकों में मोबाइल का क्ेज प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। नई टेक्नॉलाजी और सुविधाओं से परिपूर्ण मोबाइल आज पहले की अपेक्षा कम दामों में उपलब्ध हैं। ये मोबाइल कैमरा, आडियो-वीडियो और रेडियो और इन्टरनेट जैसी आदि आद्युनिकतम सेवाओं से लैस हैं। डेटिग-चैटिग या मैसेजिग आद्युनिक युवकों की दिनचर्या बन चुकी है। इन मोबाइल से सम्बधित सुविधाओं सें कोई भी कहीं भी अपने दोस्त - यारों से सम्पर्क में रह सकते हैं क्योंकि अब मोबइल की लोकप्रियता सिर्फ द्गाहरों और कस्बों तक ही सीमित नहीं है बल्कि देद्गा से सुदूर आंचलिक इलाके भी मोबाइल के कवरेज में हैं।
मोबाइल कन्ति का 'लड कियां' भी मजा उठा रही हैं लड कियों की उगलियां मोबाइल पर सरपट दौड ती देखी जा सकती है। लेकिन द्गाहरों की अपेक्षा अभी गांवों में इसका प्रचलन कुछ हद तक कम है कारण द्गाहरी और ग्रामीण माहौल, परन्तु वह दिन अधिक दूर नहीं जब भारत में द्गात प्रतिद्गात मोबाइल धारक हो जाएंगे।
कबूतर, प्रेमपत्र, और फूल के माध्यम से प्यार का इजहार करने का फार्मूला नवयुवकों में पूर्णरूपेण समाप्त हो चुका है। आज की युवा पीढ ी मोबाइल के जरिए मैसेज, एमएमएस, भेज अपने प्यार का इपहार कर रहे है। इसके जरिए प्रेमी - प्रेमिका एक दूसरे को फूल, प्रेम पत्र और न जाने क्या क्या बस कुछ पलों में भेजते हैं। अतः मोबाइल आज के युवा की अहम् जरुरत है।
भारत में पोलियो का सफाया नजदीक
पोलियो के खिलाफ लड़ाई में भारत को खासी कामयाबी मिल रही है. देश भर में 2010 के दौरान पोलियो के सिर्फ 42 मामले सामने आए जबकि 2009 में इनकी संख्या 741 थी. सरकार ने कहा पोलियो मुक्त भारत का लक्ष्य पाया जा सकता है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने बताया कि देश में पोलियो उन्मूलन की कोशिशें शुरू होने के बाद से पिछले छह महीनों के दौरान इस बीमारी के सबसे कम मामले देखने में आए हैं. उन्होंने कहा, "2010 में पोलियो के कुल 42 मामले पाए गए जबकि 2009 में 741 लोगों में यह बीमारी पाई गई." आजाद ने बताया कि पोलियो से प्रभावित जिलों की संख्या भी तेजी से घटी है. 2009 में पोलियो ग्रस्त जिलों की संख्या 56 थी जो पिछले साल सिर्फ 17 रह गई है. वहीं 2008 में 90 जिलों में पोलियो का प्रकोप था.
उत्तर प्रदेश में पिछले साल पोलियो के सिर्फ 10 मामले सामने आए जबकि एक साल पहले इनकी संख्या 602 थी. खासकर अप्रैल 2010 के बाद से देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में कोई व्यक्ति पोलिया का पीड़ित नहीं मिला. आजाद ने बताया कि रविवार से शुरू होने वाले देश व्यापी अभियान में पांच साल के कम उम्र के 17.4 करोड़ बच्चों को पोलिया की दवा पिलाई जाएगी. मार्च से नवंबर के बीच उन क्षेत्रों में छह अभियान और चलाए जाएंगे जहां पोलिया का सबसे ज्यादा खतरा है. आजाद के मुताबिक, "इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान और गुजरात शामिल हैं."
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पोलिया के मामलों में गिरावट को देखते हुए पोलियो मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि देश के किसी भी हिस्से में पोलिया का वायरस दिखने पर उससे निपटने के लिए खास कार्यबल का गठन किया जा रहा है ताकि आगे उसका प्रसार न हो सके. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शनिवार को राष्ट्रपति भवन में सात बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिला कर 2011 के पोलियो उन्मूलन अभियान की शुरुआत की.
सोमवार, 24 जनवरी 2011
दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक केंद्रों में लखनऊ भी


लंदन, 24 जनवरी (प्रेट्र) : भारत विश्व के पर्यटकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। एक नए सर्वेक्षण ने फिर इस पर मोहर लगा दी है। दुनिया के 50 उत्कृष्ट सांस्कृतिक केंद्रों में भारत के तीन शहरों लखनऊ, आगरा और जयपुर को शामिल किया गया है। इनमें आगरा शीर्ष पर है, जहां दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल है। संडे टेलीग्राफ व ट्रैवल विशेषज्ञ पेज एंड माय द्वारा यह सूची जारी की गई है। सूची में जयपुर को 27वां और लखनऊ को 32वां स्थान हासिल हुआ है। आगरा में ताजमहल के साथ पर्यटकों से किले, फतेहपुर सीकरी, एतमाद-उद-दौला के मकबरे, वृंदावन और भरतपुर के पक्षी अभयारण्य को देखने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा अन्य महान सांस्कृतिक केंद्रों में एमस्टर्डम, अंगकोरवाट, एथेंस, बैंकॉक, बार्सिलोना, बीजिंग, बुखारा, काहिरा, इस्तांबुल, यरुशलम, क्योटो, सिडनी, तेहरान, वेनिस, वियाना और वारसा भी हैं।
पहला पृष्ठ 132 | 74 आपको पता है भारत में एक नहीं तीन-तीन 'ताजमहल' हैं!



ताजमहल कहां है? यह सवाल जितनी बार जहन में आत है उतनी बार एक ही जवाब जुबान पर आता है और वो है आगरा। लेकिन यह बात जान कर आपको हैरानी होगी कि भारत में एक नहीं तीन ताजमहल हैं।
विशेषज्ञों से बातचीत के दौरान पता चला कि मुगल बादशाह शाहजहां को ताजमहल बनवाने का खयाल अपने पिता जहांगीर की बेगम नूरजहां के पिता एतमादुद्यौला का मकबरा देख कर आया था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस मकबरे का निर्माण 1625 में किया गया था। बेबी ताज के नाम से मशहूर इस मकबरे की कई चीजों का इस्तेमाल शाहजहां ने ताजमहल बनवाते समय किया था। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि यही वह मकबरा है जो भारत में पहला ऐसा मकबरा था जो पूरी तरह सफेद संगमरमर से बनाया गया था।
इतिहास के पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि इस मकबरे को देख कर मुमताज ने शाहजहां से अपनी मृत्यु के बाद ऐसा ही खूबसूरत मकबरा बनवाने की गुजारिश की थी। जो मुमताज की मृत्यु के बाद शाहजहां ने आगरा में बने भव्य ताजमहल को बनवा कर पूरी कर दी थी।
इस तरह देखा जाए तो ताजमहल और बेबी ताज को मिला कर भारत में दो ताजमहल हैं। लेकिन विशेषज्ञों की माने तो भारत में तीसरा ताजमहल भी है। और वह महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में । इस ताजमहल को मिनी ताजमहल के नाम से जाना जाता है। जबकी इसका वास्तविक नाम बीबी का मकबरा है। यह शाहजहां के सुपुत्र औरंगजेब की बेगम साहिबा की समाधि है।
इस मकबरे को देख कर आप हैरान रह जाएंगे क्योंकि इसे बाहर से देखने पर यह बिलकुल ताजमहल की कार्बन कॉपी लगता है। बताया जाता है कि इस मकबरे को औरंगजेब ने ताजमहल के निर्माण के बाद बचे हुए सामान से बनवाया था। गौरतलब है कि औरंगजेब ने अपने अय्याश पिता शाहजहां को ताजमहल के सामने बने लालकिले मे नजरबंद कर दिया था। जिसके बाद ही उसने अपनी बेगम के लिए यह मकबरा बनवाया था।
सूचना-
आने वाली 18 फरवरी से ताज महोत्सव शुरू होने वाला है। इस उत्सव के दौरान दैनिक भास्कर.कॉम ताजमहल के इतिहास और उससे जुड़ी कुछ रोचक बातों से अपने पाठकों को रू-ब-रू करवाने का प्रयास करेगा। पाठकों से गुजारिश है कि वह भी ताजमहल से जुड़े अपने अनुभव और तस्वीरों को हमसे बांटे। हम आपके अनुभवों और तस्वीरों को वेबसाईट पर आपके नाम से पब्लिश करेंगे। अपने अनुभवों और तस्वीरों को (news@imcl.co.in)
यह औरंगाबाद, महाराष्ट्र में स्थित है। यह मकबरा अकबर एवं शाहजहाँ के काल के शाही निर्माण से अंतिम मुगलों के साधारण वास्तुकला के परिवर्तन को दर्शाता है। ताजमहल से तुलना के कारण ही यह उपेक्षा का कारण बना रहा। सम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता की स्मृति में आगरा में एतमादुद्दौला का मकबरा बनवाया था। यह उसके पिता घियास-उद-दीन बेग़, जो जहांगीर के दरबार में मंत्री भी थे, की याद में बनवाया गया था।
शनिवार, 22 जनवरी 2011
अश्लील ईमेल भेजने पर वीसी का इस्तीफा
प्रफेसर ने पिछले साल 3 अप्रैल को यहां वाइस चांसलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने शिकायत की थी कि बेलियप्पा ने उन्हें 'आपत्तिजनक ' ईमेल भेजा था। इसके बाद बेलियप्पा को गिरफ्तार कर लिया गया था।
बेलियप्पा ने पहले कहा था कि उन्हें लेडी प्रोफेसर की ओर से एक ईमेल मिला था, जिसका उन्होंने जवाब भर दिया था। इस पर प्रफेसर का कहना था कि किसी ने उनका ईमेल अकाउंट हैक कर लिया था और उससे बेलियप्पा और 20 अन्य को 'आपत्तिजनक ' संदेश भेज दिए थे।
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23-01-2011
ब्राम्हमण और श्रमण परंपरा
WDचाहे हिंदू, पारसी, यहूदी, ईसाई, इस्लाम हो या फिर चर्वाक, जैन, शिंतो, कन्फ्युशियस या बौद्ध हो, आज धरती पर जितने भी धर्म हैं, उन सभी का आधार यही प्राचीन परम्परा रही है। इसी परम्परा ने वेद लिखे और इसी से जिनवाद की शुरुआत हुई। यही परम्परा आगे चलकर आज हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म कहलाती है। हजारों वर्षों के इस सफर में इस परम्परा ने बहुत कुछ खोया और इसमें बहुत कुछ बदला गया। आज जिस रूप में यह परम्परा है यह बहुत ही चिंतनीय विषय होगा, उनके लिए जो इस परम्परा के जानकार हैं।
अरिष्टनेमि और कृष्ण तक तो यह परम्परा इस तरह साथ-साथ चली कि इनके फर्क को समझना आमजन के लिए कठिन ही था लेकिन बस यहीं से धर्म के व्यवस्थीकरण की शुरुआत हुई तो फिर सब कुछ अलग-अलग होता गया।
ब्राह्मण वह है जो ब्रह्म को ही मोक्ष का आधार मानता हो और वेद वाक्य को ही ब्रह्म वाक्य मानता हो। ब्राह्मणों अनुसार ब्रह्म, और ब्रह्मांड को जानना आवश्यक है तभी ब्रह्मलीन होने का मार्ग खुलता है। श्रमण वह जो श्रम द्वारा मोक्ष प्राप्ति के मार्ग को मानता हो और जिसके लिए व्यक्ति के जीवन में ईश्वर की नहीं श्रम की आवश्यकता है। श्रमण परम्परा तथा संप्रदायों का उल्लेख प्राचीन बौद्ध तथा जैन धर्मग्रंथों में मिलता है तथा ब्राह्मण परम्परा का उल्लेख वेद, उपनिषद और स्मृतियों में मिलता है।
आज ब्राह्मण और श्रमण शब्द के अर्थ बदल गए हैं। यह जातिसूचक शब्द से ज्यादा कुछ नहीं। उक्त शब्दों को नहीं समझने के कारण अब इनकी गरिमा नहीं रही। दरअसल यह उन ऋषि-मुनियों की परम्परा या मार्ग का नाम था जिस पर चलकर सभी धर्म और जाति के लोगों ने मोक्ष को पाया। यह ऐसा ही है कि हम ऋषि और मुनि नाम की कोई जाति निर्मित कर लें और फिर उक्त शब्दों की गरिमा को भी खत्म कर दें।
यहाँ यह कहना भी जरूरी है कि उक्त दोनों परम्परा को जितना नुकसान इस परम्परा को मानने वालों से हुआ उतना ही नुकसान इस परम्परा को तोड़-मरोड़कर एक नई परम्परा को गढ़ने वालों से भी हुआ। इस सबके बीच कुछ लोग थे जिन्होंने उक्त परम्परा को उसके मूल रूप में बचाए रखा।
शुक्रवार, 21 जनवरी 2011
साली को हो गया जीजा से प्यार, मां बनी
बुलंदशहर के गुलावठी में लड़की की बहन की अप्रैल में डिलिवरी हुई थी। उसकी देख-रेख करने के लिए उसका पति ससुराल से अपनी साली हेमा (बदला नाम) को ले आया। हेमा इंटर की छात्रा है। उसका जीजा फौज में नौकरी करता है। उस समय वह दो-तीन महीने की छुट्टी लेकर अपने घर आया हुआ था। इसी दौरान जीजा-साली को प्यार हो गया। एक दिन हेमा को उसकी बड़ी बहन ने आपत्तिजनक हालत में अपने पति के साथ देख लिया। उसने अपने पति से इसका विरोध किया तो पति ने साली से अलग होने पर जहर खाकर मरने की धमकी दी।
मामले की सूचना हेमा की मां को दी गई। मां उसके पास पहुंची तो बताया गया कि वह जीजा के बच्चे की मां बनने वाली है। इसके चलते वह जीजा के घर ही रही और एक बच्चे को भी जन्म दे दिया। अब लड़की का कहना है कि वह जीजा को अपना पति स्वीकार कर चुकी है।
ताजमहल सिर्फ अमीरों के लिए!
जिस प्रेम के बेमिसाल प्रतीक ताजमहल को देखकर दुनिया भर के प्रेमी युगल कई जन्मो तक साथ-साथ जीने-मरने की कसमें खाते रहे हैं, उसे सिर्फ रईसों के लिए सीमित करने की वकालत की जा रही है।
ब्रिटेन की प्रतिष्ठित फ्यूचर लेबोरेटरी के एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि भारत में ताजमहल, मिस्र के पिरामिड और वेनिस को धनी वर्ग के लिए खेल का विशेष मैदान बना दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके।
उसने चेतावनी दी कि इन विश्व विरासत स्थलों को बचाने के लिए यदि यह कार्रवाई नहीं की गई तो पर्यटन के भारी दबाव के कारण हम अगले 20 वर्षों में इसे खो देंगे।
‘डेली एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक ये विश्व विरासतें केवल धनी लोगों के लिए सीमित की जानी चाहिए और आम पर्यटकों के देखने के लिए अलग से एक प्लेटफार्म बनाया जाना चाहिए।
भविष्यवेत्ता लॉन पियर्सन ने कहा कि भविष्य में हम जहाँ चाहते हैं वहाँ नहीं जा सकेंगे। आने वाले समय में पर्यटन की सुविधाएँ कुछ स्थलों पर होंगी और केवल धनी और प्रसिद्ध व्यक्ति ही इन पर्यटन स्थलों का टिकट खरीद पाएँगे।
गुरुवार, 20 जनवरी 2011
जीवन का नेटवर्क फेल कर देगें ''मोबाइल टावर''
सच है कि मानव अपने स्वार्थ के लिए किसी भी हद से गुजर सकता है चाहे बात पर्यावरण की हो या फिर स्वयं मानव की इसी का जीता जागता उदाहरण है सूचना क्रान्ति का ''खम्बा'' जी हां बात हो रही है मोबाइल कंपनियों के टावरों की है। जो द्राहरों से होते हुए गांव देहातों की खेतों तक जा पहॅुचे है। द्राुरु में कुछ मीडिया ने भीड़-भाड इलाके में लगें इन टावरों पर लिखा तो पर ''कमाऊ खम्भा'' होने की वजह से और विज्ञापनों के कारण उनको इन पर लिखना बंद करना पड ा। आखिर क्या पैसे के खातिर ये कंपनिया लोगों के भविद्गय के साथ नही मजाक कर रही है। और सरकारें सिर्फ अकूत धन आते देख इन पर कार्यवाही करने से बच रही है।
मोबाइल टावरों के प्रभाव
पर्यावरण पर प्रभाव : -
१-वायुमण्डल की वायु में व्याप्त सूक्ष्म जीव टावरों से निकली किरणों से अपने कार्य से हट जाते है व भटकते भटकते कई नेटवर्को में फस या तो जल जाते है या फिर घायल हो जाते है।
कारणः- विभिन्न कंपनियों के टावरों से निकलने वाली किरणे अलग-अलग फ्रक्वेंसी की होती है जिनका वातावरण में स्पेच्च तय होता है जब ये दूसरे कंपनी के नेटवर्क से टकराती है तो इस तरह की स्थित उत्पन्न हो जाती है।
२-फसलों पर भी मोबाइल सिग्नलों का बुरा प्रभाव होता है फसली पौध का परागण करने वाले जीव इसके नेटवर्क से ग्रुप में नही रह पाते और बिखर जाते है जिसका सीधा प्रभाव फसल की उपज पर पड ता है।
३- मोबाइल टावर जहां स्थापित होते है वहां जेनरेटर सहित कई द्विगामी रेडियो फ्रेक्वंसी उत्पन्न करने वाले संयत्र स्थापित किए जाते है जो आस पड ोस में तय सीमा से अधिक मात्रा से द्राोर फैलाते है।
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